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सेबी ने सबूतों के अभाव में NSE और इसके पूर्व एग्जिक्यूटिव्स के खिलाफ को-लोकेशन केस खत्म किया

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने NSE की को-लोकेशन सर्विसेज के मामले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), रवि नारायण, चित्रा रामकृष्ण, आनंद सुब्रमणियन और अन्य के खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने इस सिलसिले में 13 सितंबर को जारी आदेश में कहा, 'इस बात में कोई दो राय नहीं है कि को-लोकेशन फैसिलिटी के इस्तेमाल को लेकर NSE के पास पहले से कोई तय पॉलिसी नहीं थी'

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 13, 2024 पर 7:44 PM
सेबी ने सबूतों के अभाव में NSE और इसके पूर्व एग्जिक्यूटिव्स के खिलाफ को-लोकेशन केस खत्म किया
यह मामला 30 अप्रैल 2019 के सेबी के आदेश से शुरू हुआ था।

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने NSE की को-लोकेशन सर्विसेज के मामले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), रवि नारायण, चित्रा रामकृष्ण, आनंद सुब्रमणियन और अन्य के खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने इस सिलसिले में 13 सितंबर को जारी आदेश में कहा, 'इस बात में कोई दो राय नहीं है कि को-लोकेशन फैसिलिटी के इस्तेमाल को लेकर NSE के पास पहले से कोई तय पॉलिसी नहीं थी।'

सेबी का कहना था, 'यह TMs द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सेकेंडरी सर्वर की मॉनिटरिंग करने में भी नाकाम रही है, जबकि इसकी कोई ठोस वजह नहीं थी। NSE ने TMs को को-लोकेशन सुविधा उपलब्ध कराते वक्त वेलकम ईमेल जारी करने के बारे में जो दलील दी थी, वह शुरुआती रेगुलेटर के तौर पर इसकी भूमिका के हिसाब से सही नहीं है।' इस ऑर्डर में कहा गया है, ' सही मॉनिटरिंग के बिना गाइडलाइंस जारी करना ड्यू डिलिजेंस की कमी को दिखाता है।'

हालांकि, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ये निष्कर्ष यह साबित नहीं करते कि OPG और इसके डायरेक्टर्स के साथ NSE और इसके सीनियर मैनेजमेंट की साठगांठ थी। NSE के पूर्व VC रवि नारायण और पूर्व CEO चित्रा रामकृष्णन केस में आरोपी थे। NSE को-लोकेशन केस में कोई निर्देश जारी नहीं किया है।

कब शुरू हुआ था मामला

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