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SMEs के शेयरों पर SEBI की नजर, इन नियमों में बदलाव की तैयारी

छोटी और मंझले आकार वाली कंपनियों के आईपीओ में खुदरा निवेशक धुंआधार पैसा लगा रहे हैं। एक आईपीओ में तो खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1 हजार गुना से अधिक भर गया। लिस्टेड शेयरों में भी खुदरा निवेशक ताबड़तोड़ निवेश कर रहे हैं। हालांकि अब बाजार नियामक सेबी (SEBI) अब इन पर निगरानी करेगी। इसके लिए नियमों में बदलाव हो रहा है। जानिए किन नियमों में बदलाव हो रहा है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Sep 26, 2023 पर 9:40 AM
SMEs के शेयरों पर SEBI की नजर, इन नियमों में बदलाव की तैयारी
सेबी ने SME के शेयरों को अब शॉर्ट टर्म एडीशनल सर्विलांस मेजर (ASM) और ट्रेड-टू-ट्रेड (T2T) सेटलमेंट फ्रेमवर्क के तहत लाने का फैसला किया है।

SME Shares: छोटी और मंझले आकार की कंपनियों (SME) के शेयरों की रॉकेट स्पीड पर अब बाजार नियामक सेबी (SEBI) की निगरानी बढ़ गई है। सेबी ने इन शेयरों को अब शॉर्ट टर्म एडीशनल सर्विलांस मेजर (ASM) और ट्रेड-टू-ट्रेड (T2T) सेटलमेंट फ्रेमवर्क के तहत लाने का फैसला किया है। एक्सचेंजों की तरफ जारी सर्कुलर से इसका खुलासा हुआ है। संशोधित फ्रेमवर्क 3 अक्टूबर को जारी कर दिया जाएगा। एक्सचेंजों की तरफ से जारी सर्कुलर के मुताबिक उनके और बाजार नियामक सेबी के बीच ज्वाइंट सर्विलांस मीटिंग में इससे जुड़ा फैसला लिया गया। बैठक में फैसला लिया गया कि शॉर्ट टर्म ASM फ्रेमवर्क और T2T फ्रेमवर्क में कुछ बदलावों के बाद SME शेयरों को भी इसके तहत लाया जाएगा।

SEBI ने क्यों किया ऐसा फैसला

SME के शेयरों में पिछले कुछ समय से खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। इनके IPOs में खुदरा निवेशक तेजी से पैसे लगा रहे हैं। सेबी को इस बात की चिंता है कि इस सेगमेंट में शेयरों की कीमतों में मनमानी उतार-चढ़ाव को लेकर हेराफेरी हो सकती है। SME सेगमेंट में अभी कंप्लॉयंस की जरूरतें और नियामकीय निगरानी कम है, इसके अलावा मार्केट कैप और इक्विटी भी कम है तो मैनुपिलेशन की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा SME के IPOs को सेबी की बजाय एक्सचेंजों की मंजूरी से लाया जा सकता है। ऐसे में खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सेबी ने इन्हें भी शॉर्ट टर्म एएसएम और टी2टी फ्रेमवर्क के तहत लाने का फैसला किया है।

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