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100 साल से ज्यादा पुराना है ट्रैफिक लाइट का राज, जानें लाल-पीला-हरा ही क्यों है खास

सड़क पर लाल, पीली और हरी बत्ती इतनी आम है कि इनके पीछे की कहानी पर शायद ही कोई गौर करता है। लेकिन इन तीन रंगों का चुनाव यूं ही नहीं हुआ। बढ़ते ट्रैफिक और सड़क हादसों के बीच ऐसी व्यवस्था की जरूरत पड़ी, जिसे हर कोई आसानी से समझ सके। यहीं से इन रंगों की कहानी शुरू हुई

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Aug 16, 2026 पर 12:17 PM
100 साल से ज्यादा पुराना है ट्रैफिक लाइट का राज, जानें लाल-पीला-हरा ही क्यों है खास
आज ट्रैफिक सिग्नल के ये तीन रंग दुनिया के लगभग हर हिस्से में पहचाने जाते हैं।

सड़क पर लाल, पीली और हरी बत्ती हमारे रोजमर्रा के जीवन का इतना सामान्य हिस्सा है कि शायद ही कभी मन में सवाल आता हो कि ट्रैफिक सिग्नल के लिए आखिर इन्हीं तीन रंगों को क्यों चुना गया। लेकिन इन रंगों के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प और पुरानी है। आज से एक सदी से भी पहले, जब शहरों की सड़कें कारों, साइकिलों, घोड़ागाड़ियों, ट्राम और पैदल यात्रियों से तेजी से भरने लगी थीं, तब यातायात को संभालना बड़ी चुनौती बन गया था। हर तरफ बढ़ती भीड़ के बीच दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा था।

ऐसे में एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत महसूस हुई, जिसे सड़क पर मौजूद हर व्यक्ति आसानी से समझ सके। धीरे-धीरे संकेतों की तकनीक विकसित हुई और लाल, पीले व हरे रंगों ने अपनी खास जगह बना ली। लेकिन इन तीनों रंगों का चुनाव सिर्फ पसंद के आधार पर नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे सुरक्षा और स्पष्टता से जुड़ी खास वजहें थीं।

1868 में लंदन से हुई शुरुआत

दुनिया की पहली ट्रैफिक लाइट 1868 में लंदन में लगाई गई थी। इसका डिजाइन रेलवे सिग्नल से प्रेरित था और इसमें गैस से रोशन होने वाली व्यवस्था थी। इसमें केवल दो संकेत थे रुकना और आगे बढ़ना।जैसे-जैसे शहरों में वाहनों की संख्या बढ़ी, चौराहों पर पुलिसकर्मियों को खड़े होकर ट्रैफिक संभालना पड़ता था। लेकिन बढ़ती भीड़ के बीच यह तरीका हादसों को पूरी तरह रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था।

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