सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने मंगलवार को कहा कि शेयर बाजार के नियामक का काम नए जमाने की टेक कंपनियों को उनके इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) की कीमत सुझाना नहीं है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों को इस बारे में अधिक खुलासा करना चाहिए कि कैसे उनका वैल्यूएशन प्री-आईपीओ प्लेसमेंट और आईपीओ के बीच में बदल जाता है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, माधवी पुरी बुच ने इंडस्ट्री संगठन फिक्की की तरफ से आयोजित एक सालाना कैपिटल मार्केट सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, "टेक्नोलॉजी कंपनियों के IPO के प्राइस-बैंड को लेकर काफी कुछ कहा जाता है। आप किस वैल्यूएशन पर IPO लाना चाहते हैं यह देखना आपका काम है। हमारा इसके बारे में सुझाव देने का काम नहीं है।"
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई कंपनी निवेशकों को 100 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयर बेच रही है। लेकिन कुछ माह बाद जब वह IPO लाती है, तो वह अपने शेयर के लिए 450 रुपये का भाव मांगती है। उन्होंने कहा कि कंपनी ऊंचा दाम मांगने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन उसे यह खुलासा करना चाहिए कि इस बीच की अवधि में ऐसा क्या हुआ है जिससे शेयर का भाव इतना बढ़ गया है। बता दें कि माधवी पुरी बुच, SEBI की पहली महिला चीफ है।
हाल में ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं, जब नए जमाने की टेक कंपनियों ने ऊंचे वैल्यूएशन पर अपने आईपीओ का प्राइस तय किया। हालांकि शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद उनकी कीमत कुछ ही समय में आधे से अधिक घट गई। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित रिटेल निवेशक होते हैं। फिनटेक फर्म पेटीएम का शेयर लिस्टिंग के कुछ हफ्ते में ही अपने IPO के इश्यू प्राइस का एक-तिहाई रह गया।
हालिया घटनाक्रमों पर सवाल पूछे जाने पर बुच ने कहा कि इनवेस्टमेंट बैंकरों को इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेबी कोई रेगुलेशन बनाते समय अपने रुख को लोकतांत्रिक रखेगा और यह सिर्फ आंकड़ों के आधार पर काम करेगा।
उन्होंने कहा कि रिस्ट्रक्चर प्रक्रिया के तहत SEBI ने प्रत्येक ऐसे विभाग में एक से तीन अधिकारियों की नियुक्ति की है जिनका मुख्य फोकस ऐसे रेगुलेशन के विचार लाना है जिससे इंडस्ट्री ‘खुश’ हो सके।’’