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SEBI ने ट्रेडिंग मेंबर्स के लिए इंडेक्स F&O पॉजिशन लिमिट 15 गुना बढ़ाई, जानिए क्या है इसका मतलब

SEBI ने नई पोजीशन लिमिट का ऐलान 15 अक्टूबर को किया। अब ट्रेडिंग मेंबर्स के लिए (क्लाइंट एंड प्रॉपरायटरी ट्रेड्स दोनों शामिल) पॉजिशन लिमिट 7,500 करोड़ रुपये या मार्केट में टोटल ओपन इंटरेस्ट (ओआई) का 15 फीसदी होगी। पहले यह 500 करोड़ रुपये या टोटल मार्केट इंटरेस्ट का 15 फीसदी थी

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 16, 2024 पर 11:31 AM
SEBI ने ट्रेडिंग मेंबर्स के लिए इंडेक्स F&O पॉजिशन लिमिट 15 गुना बढ़ाई, जानिए क्या है इसका मतलब
सेबी पोजीशन लिमिट की मॉनिटरिंग के तरीके में भी बदलाव कर रहा है। नया तरीका 1 अप्रैल, 2025 से लागू हो जाएगा।

सेबी ने इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग मेंबर्स (टीएम) की पोजीशन लिमिट बढ़ा दी है। मार्केट रेगुलेटर ने 15 अक्टूबर को इसका ऐलान किया। अब ट्रेडिंग मेंबर्स के लिए (क्लाइंट एंड प्रॉपरायटरी ट्रेड्स दोनों शामिल) पॉजिशन लिमिट 7,500 करोड़ रुपये या मार्केट में टोटल ओपन इंटरेस्ट (ओआई) का 15 फीसदी होगी। पहले यह 500 करोड़ रुपये या टोटल मार्केट इंटरेस्ट का 15 फीसदी थी। इसका मतलब है कि पोजिशन लिमिट बढ़ाकर 15 गुना कर दी गई है। नया नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।

नई पोजीशन लिमिट प्रॉपरायटरी ट्रेड्स और क्लाइंट ट्रेड्स दोनों पर लागू

SEBI ने इस बारे में एक रिलीज जारी की है। इसमें कहा गया है कि नई पोजीशन लिमिट फ्यूचर्स एंड ऑप्शन (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स के सभी ओपन पोजिशन पर अलग-अलग लागू होगी। नई पोजीशन लिमिट प्रॉपरायटरी ट्रेड्स और क्लाइंट ट्रेड्स दोनों पर लागू होगी। प्रॉपरायटरी ट्रेड्स का मतलब ऐसे ट्रेड से हैं, जिसमें ट्रेडिंग फर्म खुद अपना पैसे को इनवेस्ट करती है। क्लाइंट ट्रेड्स में ट्रेडिंग फर्म क्लाइंट की तरफ से उसके पैसे को इनवेस्ट करती है।

पोजीशन लिमिट की मॉनिटरिंग का तरीका भी बदलेगा

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