इमर्जिंग मार्केट्स के बारे में चर्चा बढ़ गई है। ज्यादातर चर्चा इंडिया और चीन से जुड़ी है। दरअसल, एमएससीआई ईएम इंडेक्स में दोनों देशों की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है। इमर्जिंग मार्केट्स में इंडिया के बाद ताइवान की पोजीशन है। उसके बाद दक्षिण कोरिया है। ब्राजील पांचवें पायदान पर है। इसके बाद पोलैंड, कतर, कुवैत, तुर्की, फिलीपींस और ग्रीस जैसे देश हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) दो तरह से किसी देश में इनवेस्ट करते हैं। पहला, वे सीधे उस देश के स्टॉक्स, बॉन्ड्स या दूसरी सिक्योरिटीज में इनवेस्ट करते हैं। दूसरा, वे एमएससीआई या एफटीएसई जैसे इमर्जिंग मार्केट्स सूचकांकों के आधार पर इनवेस्ट करते हैं। दूसरा रास्ता उनके लिए आसान है।
चीन में विदेसी निवेशकों की दिलचस्पी
हाल में चीन में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। चीन में सरकार और केंद्रीय बैंक ने इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाने के लिए कुछ उपायों के ऐलान किए। इसके बाद सितंबर में चीन के स्टॉक मार्केट्स में बड़ी तेजी देखने को मिली। इमर्जिंग सूचकांकों में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी चीन की है। चीन के मार्केट्स में आई तेजी के बाद विदेशी निवेशकों ने वहां निवेश करने के लिए इंडियन मार्केट्स में कुछ बिकवाली की है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल इनवेस्टर्स के सपोर्ट से इंडियन मार्केट्स में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। लेकिन, चीन के स्टॉक मार्केट्स का प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उम्मीद है।
मार्केट्स की नजरें अमेरिकी चुनाव के नतीजों पर भी
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "शॉर्ट टर्म में चीन के स्टॉक्स मार्केट्स का प्रदर्शन बेहतर रहने का अनुमान है। सरकार के बड़े राहत पैकेज का ऐलान नहीं करने के बावजूद चीन के मार्केट्स में तेजी दिख सकती है।" ऐसे में इंडियन मार्केट्स की नजरें चीन के स्टॉक मार्केट्स और चीन से आने वाली खबरों पर लगी रहेंगी। अमेरिका में अगले महीने राष्ट्रपति चुनाव है। इसके नतीजों का असर भी मार्केट्स पर पड़ेगा। अमेरिका में घटनाक्रम का असर इंडिया और चीन दोनों ही मार्केट्स पर पड़ेगा। लेकिन, इंडिया के मुकाबले चीन पर उसका ज्यादा असर पड़ेगा।
विप्रो का शेयर 15 अक्टूबर को 3.1 फीसदी गिरकर 532.7 रुपये पर क्लोज हुआ। इसकी वजह शेयरों में बिकवाली है। Wipro के नतीजे 17 अक्टूबर को आने वाले हैं। इससे पहले कंपनी के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। कंपनी को दूसरी तिमाही में बड़े ऑर्डर्स मिले हैं, जिससे रेवेन्यू ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद है। कंपनी ने एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस बढ़ाया है। दुनिया के बड़े देशों की करेंसी के मुकाबले रुपये में कमजोरी का फायदा भी कंपनी को मिलेगा। बेयर्स का कहना है कि कंपनी ने एंप्लॉयीज की सैलरी बढ़ाई है। इसका असर EBIT मार्जिन पर दिख सकता है। इसके अलावा एनर्मजी, यूटिलिटीज और मैन्युफैक्चरिंग वर्टिकल्स में कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
जस्ट डायल के स्टॉक में 15 अक्टूबर को 3.5 फीसदी गिरावट आई। यह स्टॉक 1,215 रुपये पर बंद हुआ। Just Dial के शेयरों में गिरावट की वजह दूसरी तिमाही के नतीजे रहे। कंपनी के नतीजे मार्केट के अनुमान से कमजोर रहे हैं। बुल्स का कहना है कि कोविड के बाद कंपनी रिकवरी के चरण में है। बी2बी प्लेटफॉर्म JD Mart और JDXprt और JD Shopping जैसे नए वेचर्स से लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। बेयर्स का कहना है कि कंपनी के बिजनेस में रिकवरी तो दिख रही है, लेकिन इसकी रफ्तार सुस्त है। पेड केंपेन अब भी कोविड से पहले के लेवल से कम है। जेडी मार्ट को ज्यादा सफलता नहीं मिली है।
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सनटेक रियल्टी का शेयर 15 अक्टूबर को 7.65 फीसदी उछाल के साथ 596.80 रुपये पर बंद हुआ। इसकी वजह दूसरी तिमाही में कंपनी का अच्छा प्रदर्शन है। कंपनी ने इस दौरान 520 करोड़ रुपये का प्री-सेल्स हासिल किया है। Sunteck Realty ने मुंबई के मार्केट्स पर फोकस बनाए रखा है। मुनाफे के लिहाज से यह मार्केट अच्छा है। कंपनी हाई वैल्यू लैंड डील पूरी करने की क्षमता रखती है। इससे इसकी ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। लेकिन, मुंबई के रेजिडेंशियल मार्केट्स में लंबे समय से जारी सुस्ती का असर कंपनी की ग्रोथ पर पड़ सकता है।