SEBI रिटेल इनवेस्टर्स को एल्गो ट्रेडिंग की इजाजत दे सकता है, जानिए मार्केट रेगुलेटर का क्या है प्लान

अगर सेबी रिटेल इनवेस्टर्स को एल्गो ट्रेडिंग की इजाजत दे देता है तो वे ब्रोकर्स के जरिए एप्रूव्ड एल्गो का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए एल्गो और इससे जुड़े सिस्टम का रजिस्ट्रेशन स्टॉक एक्सचेंजों के पास कराना होगा

अपडेटेड Dec 13, 2024 पर 5:02 PM
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इस बारे में मार्केट रेगुलेटर ने एक सर्कुलर जारी किया है। इस प्रस्ताव पर आम लोगों की राय मांगी गई है।

सेबी रिटेल इनवेस्टर्स को एल्गो ट्रेडिंग की इजाजत दे सकता है। इस बारे में मार्केट रेगुलेटर ने एक सर्कुलर जारी किया है। इस प्रस्ताव पर आम लोगों की राय मांगी गई है। सेबी रिटेल इनवेस्टर्स के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रख इस बारे में नियम बना सकता है। एल्गोरिद्म ट्रेडिंग में ट्रेड्स के लिए कंप्यूटर प्रोग्राम का इस्तेमाल होता है। यह प्रोग्राम पहले से तय प्राइस, टाइमिंग और वॉल्यूम पर काम करता है। अब तक एल्गो ट्रेडिंग का इस्तेमाल संस्थागत निवेशक करते रहे हैं।

एल्गो प्रोग्राम का रजिस्ट्रेशन कराना होगा

अगर सेबी (SEBI) रिटेल इनवेस्टर्स को एल्गो ट्रेडिंग की इजाजत दे देता है तो वे ब्रोकर्स के जरिए एप्रूव्ड एल्गो (Algo) का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए एल्गो और इससे जुड़े सिस्टम का रजिस्ट्रेशन स्टॉक एक्सचेंजों के पास कराना होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेबी के इस फैसले से एल्गो ट्रेडिंग का इस्तेमाल रिटेल इनवेस्टर्स भी कर सकेंगे। रिटेल इनवेस्टर्स को ब्रोकर्स एल्गो ट्रेडिंग सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए सुरक्षा के कड़े मानदंडों का पालन होगा।


सेबी ने मांग है आम लोगों की राय

सेबी के ड्राफ्ट सर्कुलर पर 3 जनवरी, 2025 तक राय दी जा सकती है। उसके बाद सेबी इस मसले से जुड़े सभी पक्षों के साथ चर्चा करेगा। फिर रिटेल इनवेस्टर्स के लिए एल्गो ट्रेडिंग के नियम अगले साल जारी कर दिए जाएंगे। मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि एल्गो ट्रेडिंग फैसिलिटी सिर्फ स्टॉक ब्रोकर्स की तरफ से उपलब्ध कराई जाएगी। हर एल्गो के लिए स्टॉक एक्सचेंजों का एप्रूवल जरूरी होगा। अभी कुछ इनवेस्टर्स ट्रेड प्लेस करने के लिए अपना एल्गो तैयार करते हैं। सेबी का मानना है कि ऐसे ट्रेडर्स को अपने एल्गो एक्सचेंजों के पास रजिस्टर्ड कराना होगा।

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निवेशकों के हित को ध्यान में रख तैयार होगा फ्रेमवर्क

ब्रोकर्स को ओपन एपीआई की इजाजत नहीं देने को कहा जा सकता है। उन्हें सिर्फ यूनिक वेंडर क्लाइंट स्पेशिफिक एपीआई की और स्टैटिक आईपी के जरिए इजाजत देनी होगी। वेंडर और एंड-यूजर की ट्रेसिलिबिटी के लिए आइडेंटिफिकेशन जरूरी होगा। पिछले काफी समय से रिटेल इनवेस्टर्स एल्गो ट्रेड के इस्तेमाल की इजाजत मांग रहे हैं। सेबी रिटेल इनवेस्टर्स के हितों को ध्यान में रख इस बारे में नियम और कानून बनाने पर विचार कर रहा है।

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