F&O के नए नियमों पर SEBI जल्द जारी कर सकता है सर्कुलर, जानिए मार्केट रेगुलेटर का क्या है प्लान

SEBI के बोर्ड की 30 सितंबर की बैठक में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के नए नियमों पर कोई फैसला नहीं हुआ। इसका मतलब यह नहीं है कि इस मसले पर सेबी की सोच बदल गई है। सूत्रों का कहना है कि नए नियमों को लागू करने के लिए मार्केट रेगुलेटर जल्द सर्कुलर जारी कर सकता है

अपडेटेड Oct 01, 2024 पर 12:18 PM
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सेबी ने F&O के नियमों में बदलाव के बारे में राय देने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी।

सेबी के बोर्ड की बैठक में 30 सितंबर को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) के नियमों में बदलाव पर कोई फैसला नहीं हुआ। इससे स्टॉक मार्केट्स ने राहत की सांस ली है। लेकिन, यह राहत ज्यादा समय के लिए नहीं है। एफएंडओ में बढ़ते वॉल्यूम पर सेबी की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। मार्केट रेगुलेटर डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नए नियमों को लागू करने के लिए जल्द एक ड्राफ्ट सर्कुलर जारी कर सकता है। इस मसले से जुड़े लोगों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर मनीकंट्रोल को यह बताया है।

नए नियमों के ड्राफ्ट को एप्रूवल की जरूरत नहीं

सूत्रों ने यह बताया है कि डेरिवेटिव (Derivatives) के नए नियमों के ड्राफ्ट को सेबी (SEBI) के बोर्ड के एप्रूवल की जरूरत नहीं पड़ेगी। उम्मीद की जा रही थी कि 30 सितंबर को सेबी के बोर्ड की बैठक में एफएंडओ के नए नियमों को लागू करने का फैसला हो सकता है। लेकिन, बोर्ड ने इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया। मनीकंट्रोल ने 9 जुलाई को खबर दी थी कि सेबी एफएंडओ ट्रेडिंग के नए नियमों को लागू करने पर विचार कर रहा है। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) के नए नियम एक कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए हैं।


सेबी ने बनाई थी एक एक्सपर्ट कमेटी

सेबी ने F&O के नियमों में बदलाव के बारे में राय देने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। दरअसल, पिछले कुछ समय से एफएंडओ ट्रेडिंग में जिस तरह से रिटेल ट्रेडर्स की दिलचस्पी बढ़ी है, उससे सेबी काफी चिंतित है। कोविड की महामारी के बाद यह बदलाव देखने को मिला है। खास बात यह है कि मार्केट रेगुलेटर का मानना है कि ज्यादातर रिटेल ट्रेडर्स को एफएंडओ ट्रेडिंग में लॉस हो रहा है। इसकी पुष्टि सेबी की कई रिपोर्ट से हुई है। हाल में सेबी की एक स्टडी में कहा गया है कि एफएंडओ में 93 फीसदी रिटेल ट्रेडर्स को पिछले तीन साल में लॉस उठाना पड़ा है। उनका लॉस 1.8 लाख करोड़ रुपये है।

एफएंडओ में रिटेल ट्रेडर्स की बढ़ती दिलचस्पी से सेबी नाखुश

सेबी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि FY23 में 92.5 लाख रिटेल ट्रेडर्स को एफएंडओ ट्रेडिंग में करीब 51,700 करोड़ रुपये (स्टैट्यूचरी ट्रांजेक्शन कॉस्ट छोड़कर) लॉस हुआ है। सेबी रिटेल इनवेस्टर्स को इस नुकसान से बचाने के लिए एफएंडओ के नियमों को सख्त बनाना चाहता है। मार्केट रेगुलेटर ने इस बारे में कई प्रस्ताव तैयार किए हैं। उसने इस बारे में एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया था। इस पर मार्केट से जुड़े लोगों की राय मांगी गई थी। अब सेबी किसी भी समय नए नियमों को लागू करने का ऐलान कर सकात है। इससे स्टॉक मार्केट्स को काफी झटका लगेगा। मार्केट की लिक्विडिटी पर सीधा असर पड़ेगा।

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एफएंडओ के नियमों में ये बदलाव हो सकते हैं

प्रस्तावित नियमों में मिनिमम कॉनट्रैक्ट साइज बढ़ाने की बात कही गई है। इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए मिनिमम कॉन्ट्रैक्ट साइज को शुरुआत में बढ़ाकर 15-20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। बाद में इसे बढ़ाकर 20-30 लाख रुपये करने का प्लान है। सेबी वीकली ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट में भी कमी करना चाहता है। वह एक स्टॉक एक्सचेंज में सिंगल बेंचमार्क इंडेक्स शुरू करना चाहता है। अभी इंडेक्स ऑप्शंस के 6 वीकली कॉन्ट्रैक्ट हैं। सेबी एक्सपायरी से पहले एक्सट्रीम लॉस मार्जिन (ELM) भी बढ़ाना चाहता है। एक्सपायरी के दिन शुरुआत में इसे 3 फीसदी और बाद में 5 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा भी सेबी कई नए नियम लागू करना चाहता है।

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