SEBI के नए चीफ तुहिन कांत पांडेय ने कहा-सेबी एंप्लॉयीज के हितों के टकराव के बारे में बताएगा

सेबी के नए चेयरपर्सन तुहिन कांत पांडेय ने 7 मार्च को मनीकंट्रोल ग्लोबल वेल्थ समिट 2025 में मार्केट रेगुलेटर के बारे में कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सेबी का फोकस छोटे-छोटे रिफॉर्म्स और निवेशकों के हितों की रक्षा पर होगा। उन्होंने इनवेस्टर्स का भरोसा बनाए रखने पर भी जोर दिया

अपडेटेड Mar 07, 2025 पर 1:13 PM
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सेबी के नए चीफ ने चार 'T' पर सेबी के फोकस पर जोर दिया। चार टी का मतलब-ट्रस्ट, ट्रांसपेरेंसी, टीमवर्ग और टेक्नोलॉजी से है।

सेबी के नए चेयरपर्सन तुहिन कांत पांडेय ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सेबी के लिए भी जरूरी है और इसलिए मार्केट रेगुलेटर अब अपने एंप्लॉयीज के हितों के टकराव के बारे में बताएगा। उन्होंने मनीकंट्रोल ग्लोबल वेल्थ समिट 2025 में ये बातें कही। सेबी के नए चीफ की जिम्मेदारी संभालने के बाद अपने पहले पब्लिक एड्रेस में उन्होंने यह कहा। माधबी पुरी बुच के रिटायरमेंट के बाद पांडेय सेबी के चीफ बनाए गए हैं।

हितों के टकराव के बारे में पब्लिक को बताएंगे

Tuhin Kanta Pandey ने कहा, "निवेशकों का भरोसा बना रहे इसके लिए ट्रस्ट और ट्रांसपेरेंसी बनाए रखना बहुत जरूरी है। रेगुलेटरी बॉडीज और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए गवर्नेंस और ट्रांसपेरेंसी का उच्चतम स्तर बनाए रखना जरूरी है...भरोसा और पारदर्शिता बनाए रखना सेबी के लिए भी जरूरी है। इसलिए हमें बोर्ड में हितों के टकराव को लेकर ज्यादा पारदर्शी होने की जरूरत है। हम (आगे) हितों के ऐसे टकराव के बारे में पब्लिक को बताएंगे।"


चार 'T' पर मार्केट रेगुलेटर का फोकस बना रहेगा

सेबी के नए चीफ ने चार 'T' पर सेबी के फोकस पर जोर दिया। चार टी का मतलब-ट्रस्ट, ट्रांसपेरेंसी, टीमवर्ग और टेक्नोलॉजी से है। उन्होंने सेबी के अंदर और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच टीम वर्क के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "टीम वर्क सिर्फ सेबी के अंदर जरूरी नहीं है बल्कि यह उसके बाहर भी जरूरी है" उन्होंने भविष्य में पॉलिसी मेकिंग, टेक्नोलॉजी ए़डॉप्शन, इनवेस्टर अवेयरनेस और फाइनेंशियल इनक्लूजन को लेकर सेबी के एप्रोच का भी संकेत दिया।

छोटे-छोटे रिफॉर्म्स पर होगा सेबी का फोकस

उन्होंने कहा कि रिफॉर्म्स बहुत धमाकेदार हो ऐसा जरूरी नहीं है। छोटे-छोटे और लगातार रिफॉर्म्स करना भी अहम हो सकता है। उन्होंने कहा कि SEBI छोटे और बड़े दोनों ही तरह के रिफॉर्म्स करेगा। उन्होंने कहा कि मार्केट रेगुलेटर का मकसद जरूरत से ज्यादा रेगुलेशन नहीं बल्कि सही रेगुलेशन होगा। रेगुलेटर इनोवेशन को बढ़ावा देगा। एफिशियंसी को बढ़ाएगा और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से निवेशकों के हितों की रक्षा करेगा।

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इनवेस्टर्स के हितों पर रेगुलेटर का फोकस बना रहेगा

पांडेय ने कहा, "सेबी ने निवेशकों के हित के लिए सिस्टम में रिस्क घटाने के उपाय किए हैं। मोटे तौर पर रिफॉर्म्स का मकसद मार्केट में एफिशियंसी और ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना है। इसके लिए रेगुलेटर ने टेक्नोलॉजी का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया है। रेगुलेटर निवेशकों के हित में काम करता रहेगा। वह इनवेस्टर पूरी तरह से सुरक्षित है, जिसके पास पूरी जानकारी है। इस दिशा में रेगुलेटर और कोशिश करने जा रहा है। "

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