SEBI News : सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने सोमवार, 23 फरवरी को कहा कि रेगुलेटर ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) रेगुलेशंस का पूरा रिव्यू शुरू कर दिया है और प्रस्तावित बदलावों पर एक कंसल्टेशन पेपर जून में जारी होने की संभावना है। PMS इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए,पांडे ने कहा कि इन्वेस्टर के हित PMS फ्रेमवर्क के फोकस में रहेंगे।
सेटलमेंट रेगुलेशंस की भी होगी समीक्षा
उन्होंने आगे कहा कि इस सेगमेंट में इन्वेस्टर ट्रांसपेरेंसी बेहतर हुई है,लेकिन मौजूदा रेगुलेशंस पर नए सिरे से गौर करने की ज़रूरत है। इंडस्ट्री बॉडी APMI को रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के अंदर PMS को एक पसंदीदा इन्वेस्टमेंट ऑप्शन बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम SEBI के सभी रेगुलेशंस का पूरी तरह से रिव्यू कर रहे हैं। ” उन्होंने यह भी बताया कि इसमें लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोज़र रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस के साथ-साथ सेटलमेंट रेगुलेशंस का भी रिव्यू शामिल होगा।
ट्रेडिंग से जुड़ी फंडिंग पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के साथ होगी बात
ट्रेडिंग से जुड़ी फंडिंग पर, SEBI चीफ ने कहा कि रेगुलेटर ट्रेडिंग के लिए लोन देने के नियमों पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के नियमों की जांच करेगा और सेंट्रल बैंक के साथ अपने विचार शेयर करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि SEBI कुछ एग्रीकल्चरल कमोडिटीज़ पर बैन का रिव्यू करने के लिए भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है, लेकिन उन्होंने इसकी टाइमलाइन के बारे में ज़्यादा नहीं बताया।
इंटरनल गवर्नेंस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि SEBI के एम्प्लॉई रेगुलेशन के तहत उसके स्टाफ से “पूरी ईमानदारी” की उम्मीद की जाती है। ज़्यादातर एम्प्लॉई अपनी ड्यूटी अच्छी तरह से निभाते हैं।
बता दें कि सेबी भारत के सिक्योरिटीज़ मार्केट को रेगुलेट करता है जिसमें पोर्टफोलियो मैनेजर,स्टॉक एक्सचेंज और लिस्टेड एंटिटी शामिल हैं। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज़,हाई-नेट-वर्थ इन्वेस्टर्स को दिए जाने वाले कस्टमाइज़्ड इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशन हैं और ये रेगुलेटर द्वारा तय खास एलिजिबिलिटी,डिस्क्लोज़र और कम्प्लायंस नॉर्म्स के हिसाब से चलते हैं।