SEBI ने एक बार फिर F&O ट्रेडिंग को लेकर चेताया, कहा-परिवारों को हो रहा हर साल 60000 करोड़ रुपये का लॉस

SEBI ने एक बार फिर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग करने वाले रिटेल ट्रेडर्स को आगाह किया है। मार्केट रेगुलेटर ने एक स्टडी के आधार पर बताया है कि F&O ट्रेडिंग की वजह से परिवारों को हर साल 60,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है

अपडेटेड Jul 31, 2024 पर 1:03 PM
SEBI ने दरअसल 30 जुलाई को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव पेश किया गया है।

फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में ट्रेडिंग कई परिवारों पर भारी पड़ रही है। इंडिया में एफएंडओ ट्रेडिंग की वजह से परिवारों को सालाना 60,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच कई बार इस बारे में चिंता जाहिर कर चुकी हैं। उन्होंने इसे एक बड़ा रिस्क माना है। हाल में मुंबई में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एक प्रोग्राम में उन्होंने कहा था कि एफएंडओ ट्रेडिंग से हर साल हो रहा 50,000-60,000 रुपये के लॉस को आईपीओ या म्यूचुअल फंड्स में लगाया जा सकता था। यह इस पैसे का सही इस्तेमाल होता। उन्होंने पूछा था कि क्या यह बड़ा मसला नहीं है।

डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के नियमों को सख्त बनाएगा सेबी

SEBI ने दरअसल 30 जुलाई को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें डेरिवेटिव्स (derivatives) में ट्रेडिंग के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव पेश किया गया है। मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि इसका मकसद छोटे निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार में स्थिरता लाना है। माना जा रहा है कि इन प्रस्तावों के लागू होने पर डेरेविटिव ट्रेंडिंग में रिटेल इनवेस्टर्स के पार्टिसिपेशन पर असर पड़ेगा। पिछले कुछ सालों में खासकर कोविड की महामारी शुरू होने के बाद F&O ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है।


एफएंडओ में बढ़ती दिलचस्पी इकोनॉमी के लिए भी रिस्क

बुच ने पहले एक बार कहा था कि एफएंडओ में बढ़ती दिलचस्पी की वजह से न सिर्फ इंडिविजुअल इनवेस्टर्स के लिए रिस्क बढ़ा है बल्कि यह एक सिस्टमैटिक रिस्क भी हो सकता है। इसके चलते इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए भी मुश्किल पैदा हो सकती है। सेबी की एक स्टडी के मुताबिक, F&O सेगमेंट के 90 फीसदी ट्रेड पर लॉस होता है। माना जा रहा है कि इसी चिंता की वजह से मार्केट रेगुलेटर ने 30 जुलाई को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है।

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इंडेक्स ऑप्शन के टर्नओवर में हैरतअंगेज वृद्धि

इंडेक्स ऑप्शंस के टर्नओवर का पता उसके प्रीमियम से चलता है। यह 2018 में 4.5 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024 में बढ़कर 140 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान, डेरिवेटिव सेगमेंट में कुल टर्नओवर 210 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 500 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें इंडिविजुअल इनवेस्टर्स का पार्टिसिपेशन 2 फीसदी से बढ़कर 41 फीसदी हो गया है। सेबी की हाल में आई एक स्टडी के मुताबिक, FY23 में इक्विटी कैश सेगमेंट में 70 फीसदी से ज्यादा इक्विटी इनवेस्टर्स को नुकसान उठाना पड़ा।

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