1 अक्टूबर या इसके बाद ऐलान किए बोनस शेयर अब रिकॉर्ड डेट के बाद 2 कारोबारी दिनों में उपलब्ध हो जाएंगे। फिलहाल, ऐसे इश्यू के शेयर रिकॉर्ड डेट से दो हफ्ते बाद ही उपलब्ध हो पाते हैं। रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है, जब कंपनी यह तय करती है कि कौन-कौन से शेयरधारक बोनस इश्यू हासिल करने के योग्य हैं। मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Sebi) ने 16 सितंबर को सर्कुलर जारी कर बोनस शेयरों के लिए T+2 ट्रेडिंग डे का प्रावधान किया है। यहां T का मतलब रिकॉर्ड डेट से है।
सेबी के सर्कुलर में इस पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है और कहा गया है कि समयसीमा के पालन में किसी भी तरह की देरी होेन पर जुर्माना भी लगेगा। यह जुर्माना 19 अगस्त 2019 को जारी सेबी के उस सर्कुलर के प्रावधानों के हिसाब से लगाया जाएगा, जिसमें सेबी के ICDR रेगुलेशंस के कुछ प्रावधानों का पालन नहीं करने पर जुर्माने की बात है।
यह प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी:
1. बोनस शेयर इश्यू करने वाली कंपनी, सेबी (LODR) रेगुलेशंस, 2015 के मुताबिक इश्यू की मंजूरी के लिए स्टॉक एक्सचेंज में अप्लाई करेगी। यह प्रक्रिया बोर्ड की बैठक में बोनस इश्यू को मंजूरी मिलने के 5 कामकाजी दिनों में हो जानी चाहिए।
2. बोनस इश्यू जारी करने वाली इकाई प्रस्तावित इश्यू के लिए रिकॉर्ड डेट (T डे) तय कर उसके बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित करेगी। साथ ही, रिकॉर्ड डेट के अगले कामकाजी दिन आवंटन के बारे में भी जानकारी देनी होगी।
3. बोनस इश्यू जारी करने वाली इकाई से जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड डेट (T डे) की सूचना मिलने पर स्टॉक एक्सचेंज रिकॉर्ड डेट और बोनस शेयरों की संख्या को लेकर नोटिफिकेशन जारी करेगा। नोटिफिकेशन में आवंटन की संभावित तारीख (T+1 डे) भी मौजूद रहेगी।
4. स्टॉक एक्सचेंज द्वारा रिकॉर्ड डेट को स्वीकार कर नोटिफिकेशन जारी किए जाने के बाद बोनस इश्यू जारी करने वाली कंपनी रिकॉर्ड डेट के अगले दिन डिपॉजिटरीज को जरूरी दस्तावेज सौंपेगी, ताकि बोनस शेयर डिपॉजिटरी सिस्टम में क्रेडिट हो सकें।
5. बोनस इश्यू के तहत आवंटित शेयर, आवंटन के अगले कामकाजी दिवस (T+2 day) को ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।