F&O Trading: फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में कितने ट्रेडर्स पैसे गंवा रहे हैं, इसका खुलासा बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की एक रिपोर्ट से हुआ है। सेबी की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2024 के बीच तीन वर्षों में 93 फीसदी ट्रेडर्स ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में 1.8 लाख करोड़ रुपये गंवा दिए। यह आंकड़ा कितना बढ़ा है, इसका अंदाज इससे लगा सकते हैं कि जनवरी 2023 में सेबी ने ऐसी ही रिपोर्ट जारी की थी जिसमें सामने आया था कि वित्त वर्ष 2022 में 89 फीसदी इंडिविजुअल इक्विटी एफएंडओ ट्रेडर्स ने पैसे गंवाए थे।
सेबी की हालिया स्टडी से खुलासा हुआ है कि 1 करोड़ से अधिक इंडिविजुअल एफएंडओ ट्रेडर्स में 93 फीसदी को तीन वित्त वर्षों में घाटा हुआ। इनका औसतन घाटा करीब 2 लाख रुपये रहा जिसमें ट्रांजैक्शन कॉस्ट भी शामिल है। इससे भी अहम ये है कि जिन्हें घाटा हुआ है, उसमें से 3.5 फीसदी यानी 4 लाख ट्रेडर्स को औसतन 28 लाख रुपये का घाटा हुआ। वहीं सिर्फ एक फीसदी ही ऐसे रहे जो 1 लाख रुपये से अधिक मुनाफा कमाने में सफल रहे। इन आंकड़ों में ट्रांजैक्शन कॉस्ट भी शामिल है।
प्रोप्रॉयटरी ट्रेडर्स और FPIs ने जमकर कमाया मुनाफा
वित्त वर्ष 2024 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स को 61 हजार करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2024 में प्रॉप्रायटरी ट्रेडर्स को 33 हजार करोड़ रुपये और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को 28 हजार करोड़ रुपये का ग्रॉस ट्रेडिंग प्रॉफिट हुआ। इन आंकड़ों से ट्रांजैक्शन कॉस्ट नहीं निकाला गया है। खास बात ये है कि इनमें से अधिकतर मुनाफा बड़ी एंटिटीज ने कमाया है जिन्होंने ट्रेडिंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया। एफपीआई के मुनाफे का 97 फीसदी और प्रोप्रॉयटरी ट्रेडर के मुनाफे का 96 फीसदी एल्गोरिदिक ट्रेडिंग से हुआ।
FY24 में इंडिविजुअल्स ने फीस में चुका दिए ₹50 हजार करोड़
अधिकतर इंडिविजुअल ट्रेडर्स को F&O सेगमेंट में मुनाफा नहीं हुआ लेकिन वित्त वर्ष 2024 में ट्रांजैक्शन कॉस्ट पर उन्हें औसतन 26 हजार रुपये खर्च करने पड़े। वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2024 के तीन वित्त वर्षों में उनका ट्रांजैक्शन कॉस्ट कुल मिलाकर 50 हजार करोड़ रुपये रहा जिसमें से 51 फीसदी तो ब्रोकरेज की फीस और 20 फीसदी एक्सचेंजों की फीस है।
म्यूचुअल फंड से ज्यादा F&O का क्रेज
उम्र के हिसाब से देखें तो F&O सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले 30 वर्ष से कम उम्र के युवाईओं की संख्या वित्त वर्ष 2023 में 31 फीसदी से उछलकर वित्त वर्ष 2024 में 43 फीसदी पर पहुंच गई। एक और दिलचस्प तथ्य ये है कि F&O ट्रेडिंग करने वाले 72 फीसदी से अधिक ट्रेडर्स टॉप के 30 शहरों के बाहर से रहे जबकि इन शहरों में म्यूचुअल फंडों की हिस्सेदारी 62 फीसदी है।
लगातार घाटे और कम सैलरी के बावजूद ट्रेडिंग
F&O ट्रेडिंग करने वाले 75 फीसदी से अधिक इंडिविजुअल्स ऐसे रहे जिनकी आय वित्त वर्ष 2024 में 5 लाख रुपये से कम थी। अब लगातार घाटे के बावजूद ट्रेडिंग जारी रखने वालों के आंकड़ों की बात करें तो सेबी के मुताबिक 75 फीसदी से अधिक ट्रेडर्स लगातार घाटे के बावजूद F&O में ट्रे़डिंग जारी रखे हुए हैं।