SEBI ने 144 करोड़ रुपये के पंप एंड डंप स्कैम के एक बड़े मामले में फाइनल ऑर्डर जारी कर दिया है। सेबी ने सारी रकम जब्त करने के साथ ही आरोपियों पर सख्त एक्शन लिया है। SEBI ने 144 करोड़ रुपए के जिस पंप एंड डंप स्कैम पर फाइनल ऑर्डर निकाला है वह पंप एंड डंप के अब तक के सबसे बड़े मामलों में से एक है। इस पंप एंड डंप में 226 एंटिटीज शामिल हैं। इसके जरिए साल 2017-2020 के बीच 5 शेयरों में खेल हुआ है।
इन पांच शेयरों में पंप एंड डंप का खेल
पंप एंड डंप का यह खेल जिन शेयरों में हुआ है उनमे मौरिया उद्योग (Mauria Udyog), विशाल फैब्रिक्स (Vishal Fabrics), 7NR रिटेल (7NR Retail), GBL इंडस्ट्रीज़ (GBL Industries) और दार्जिलिंग रोपवे (Darjeeling Ropeway) शामिल हैं।
क्या है SEBI का फाइनल ऑर्डर?
SEBI के फाइनल ऑर्डर में कहा गया है कि इन शेयरों में गलत तरीके से कमाए गए 144 करोड़ रुपए जब्त किए जाएंगे। स्कैम के मुख्य आरोपी हनीफ शेख पर 7 साल का बैन लगेगा। हनीफ शेख पर 10 करोड़ रुपये की पेनल्टी भी लगेगी। बाकी आरोपियों पर 4 से 6 साल की रोक लगेगी। इन पर सेबी ने 5 लाख से 2 करोड़ की पेनल्टी लगाई है।
पंप एंड डंप का खेल, SEBI ने कैसे किया खुलासा?
मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने हनीफ शेख को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया है। हनीफ शेख के 4 मोबाइल नंबर्स की जांच दौरान यह खुलासा हुआ है। एयरलाइन बुकिंग और होटल रिजर्वेशन के जरिए हनीफ शेख के खिलाफ सबूत जुटाए गए हैं। स्कैम के खुलासे के लिए फूड डिलीवरी एप और कर्मचारियों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। WhatsApp पर हुई बातचीत और पैसों के लेन-देन से भी सबूत इकट्ठा किए गए। मामले की जांच के लिए डोमेन रजिस्ट्रेशन की हिस्ट्री और बल्क SMS गेटवे को भी खंगाला गया। इससे पता चला कि मौरिया उद्योग (Mauria Udyog) के 62 कर्मचारियों ने शेयर बेचे थे। शेयरों में हेरफेर के जरिए मुनाफा कमाने के लिए कई शेल अकाउंट का इस्तेमाल हुआ।
SEBI ने इस मामले का पर्दाफाश करने के लिए बैंक रिकॉर्ड के अलावा भी कई चीजें देखीं। SEBI ने चार ऐसे मोबाइल नंबरों की जांच की जिनके बारे में शक था कि वे हनीफ शेख के हैं,जबकि शेख का दावा था कि वे नंबर उसके कर्मचारियों के हैं,उसके नहीं। SEBI को इस जांच के दौरान इंडिगो फ़्लाइट के ऐसे रिकॉर्ड मिले जिनसे पता चला कि बुकिंग के लिए आरोपी के अपने फोन नंबर और ईमेल का इस्तेमाल किया गया था। इससे उसका यह दावा गलत साबित हो गया कि नंबर किसी कर्मचारी का था।
होटल बुकिंग के रिकॉर्ड का इस्तेमाल घोटाले से जुड़े लोगों के बीच आपसी संबंध साबित करने के लिए किया गया। ज़ोमैटो फ़ूड डिलीवरी डेटा को यह पक्का करने के लिए क्रॉस-चेक किया गया कि असल में कौन सा फोन नंबर कौन इस्तेमाल कर रहा था। वेबसाइट की ओनरशिप का पता लगाने के लिए SEBI ने गोडैडी (GoDaddy)डोमेन रिकॉर्ड,एडमिन लॉगिन हिस्ट्री और मार्केटिंग एजेंसी के इनवॉइस की जांच की ताकि यह पता चल सके कि प्रोमोशनल वेबसाइट्स को असल में कौन कंट्रोल कर रहा था।
बल्क SMS रिकॉर्ड से पता चला कि सिर्फ़ एक स्टॉक के लिए 2.1 करोड़ से ज्यादा मैसेज भेजे गए। सभी पांच स्टॉक्स के लिए 60,000 से ज्यादा अलग-अलग नंबरों को टारगेट किया गया। जांच से पता चला कि हेरफेर वाले समय के दौरान मौरिया उद्योग के 62 कर्मचारियों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स ने शेयर बेचे। शेयर की बढ़ी हुई कीमतों से हुआ मुनाफा कई शेल/कंड्यूट अकाउंट्स (फर्जी या बिचौलिया खातों) के जरिए आगे बढ़ाया गया। इस लेयरिंग (पैसे को कई खातों में घुमाने) का मकसद असली फायदा उठाने वालों की पहचान छिपाना था।
क्या होता है पंप एंड डंप का खेल?
शेयर बाजार में निवेश करने वाले हर व्यक्ति को इसकी बारीकियों की जानकारी नहीं होती। इनमें से कई निवेशक एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर किसी शेयर को खरीदते या बेचते हैं। निवेशकों की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पंप एंड डंप का खेल खेला जाता है। सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर्स और यूट्यूबर्स भी ऐसे ही फर्जी ज्ञान का फायदा उठाकर निवेशकों को गुमराह करते हैं। मार्केट गुरु बने ऐसे धोखेबाज किसी कंपनी के शेयर को लेकर हाइप बनाते हैं और निवेशकों से उसमें पैसे लगाने की बात करते है।
इन फर्जी गुरुओं का एक कही मंत्र होता है,निवेशकों से पैसे लगवाकर किसी शेयर की कीमत बढ़वाओ और फिर उसे बेचकर निकल लो। वास्तव में ये फर्जी गुरु पहले से ही ऐसी किसी कंपनी का शेयर खरीद लेते हैं और निवेशकों को उसके बारे में अच्छी-अच्छी बातें बताकर खूब पैसे लगाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। जब निवेशक उस शेयर को खरीदना शुरू करते हैं तो जाहिर है कि मांग बढ़ने से एक्सचेंज पर उस शेयर की कीमत में भी बड़ा इजाफा हो जाता है। बस यही तो इनका मकसद है और ये फर्जी गुरु तत्काल बढ़ी कीमत पर अपने शेयर बेचकर मुनाफा काट लेते हैं। यानी पहले पंप करके शेयर के भाव बढ़ाओ और फिर उसे डंप कर दो।