ग्लोबल फैक्टर्स के चलते सोमवार को बिकवाली के तूफान से भारतीय शेयर बाजार बुरी तरह दहल गए। सेंसेक्स ने 1,700 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 52,569.57 का इंट्रा डे लो छू लिया। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या बाजार ने अपना तात्कालिक बॉटम छू लिया है या बाजार में अभी गिरावट बनी रहेगी? फिलहाल निवेश के लिए इंतजार करें या गिरावट में खरीदारी करें? आखिरकार निवेश की क्या रणनीति होनी चाहिए?
भले ही मार्केट एक्सपर्ट्स की राय पर इस पर बंटी हुई है, लेकिन ज्यादातर का मानना है कि बुधवार को फेडरल रिजर्व की मीटिंग के नतीजे आने तक शेयर बाजार में गिरावट बनी रह सकती है।
अमेरिकी बाजारों में स्थिरता आने का करें इंतजार
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिओजित फाइनेंशियल सर्विसेज के वीके विजयकुमार ने कहा कि निकट भविष्य में बाजार में कमजोरी का ट्रेंड है और विशेष रूप से ग्लोबल ग्रोथ में गिरावट का के संदर्भ में मौजूदा परिदृश्य इक्विटी जैसी रिस्की एसेट्स के लिए निगेटिव होगा। उन्होंने सुझाव दिया, अमेरिकी बाजारों में स्थिरता आने के बाद ही भारतीय बाजार में स्थिरता आएगी। इसलिए इनवेस्टर्स इंतजार कर सकते हैं और उन्हें तस्वीर साफ होने का इंतजार करना चाहिए।
डाइमेंशियंस कॉर्पोरेट फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ अजय श्रीवास्तव ने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार अति आशावादी बना हुआ था, इसलिए गिरावट जरूरी थी। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ऐसा पहली बार है, जब हम एक बेहद अनुमानित बिकवाली देख रहे हैं। बाजार के लिए यह अच्छा है। कमजोर शेयरों से बाहर निकल जाएं। अगर रिस्क लेने की क्षमता है तो अच्छे शेयरों में बने रहें।”
पोर्टफोलियो में बदलाव का है मौका
आशिका ग्रुप के हेड ऑफ रिसर्च (इंस्टीट्यूशनल इक्विटी) आशुतोष मिश्रा ने कहा कि बाजार में गिरावट को इनवेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो में बदलाव के अच्छे मौके के रूप में ले सकते हैं। उन्होंने कहा, ध्यान रखें कि इस तरह की गिरावट हमें मुनाफे की ट्रेड या निवेश करने के लिए अच्छा मौका बन सकती हैं। अगर आसपास देखें तो इस मुश्किल दौर में निवेश के कई अच्छे मौके मिल सकते हैं।
फिलहाल जारी रहेगा उतार-चढ़ाव
स्वास्तिका इनवेस्टमार्ट के हेड ऑफ रिसर्च संतोष मीणा ने कहा, यह गिरावट एक रियल्टी चेक की तरह है क्योंकि कई शेयर अपने फंडामेंटल्स से दूर हो गए हैं या बेहद ऊंची कीमत पर कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद जाहिर करते हुए गिरावट में खरीदारी की रणनीति अपनाने की वकालत की है।