Sensex और Nifty में गिरावट की ये हैं तीन बड़ी वजहें, अक्तूबर 2024 के बाद पहली बार लगातार दो महीने गिरा बाजार

लगातार गिरावट ने भारतीय बाजार के सेंटीमेंट को काफी कमजोर कर दिया है। दुनिया के दूसरे शेयर बाजारों में इतनी गिरावट देखने को नहीं मिली है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन इस साल शानदार रहा है, जबकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था दबाव में है। उस पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है

अपडेटेड Oct 02, 2026 पर 5:01 PM
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सितंबर में निफ्टी 6.1 फीसदी गिरा है। यह निफ्टी में गिरावट का लगातार दूसरा महीना था।

शेयर बाजारों में बीते 25 साल में इतनी लंबी गिरावट का सिलसिला दिखा है। यह 8वां हफ्ता है जब बाजार में गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट से इनवेस्टर्स में घबराहट है। म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में सिप के जरिए निवेश करने वाले लोगों को भी अपना पैसा डूबने की चिंता सता रही है।

दुनिया के दूसरे देशों में ज्यादा गिरावट नहीं आई

एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली, अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है। दुनिया के दूसरे शेयर बाजारों में इतनी गिरावट देखने को नहीं मिली है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन इस साल शानदार रहा है, जबकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था दबाव में है। उस पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।


विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का असर

बजाज ब्रोकिंग और मोतीलाल ओसवाल ने भारतीय बाजार में लगातार गिरावट की कई वजहें बताई हैं। इनमें FIIs की सेलिंग और खराब ग्लोबल इनवायरमेंट सबसे ऊपर हैं। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी ने कहा, "बीते एक हफ्ते में विदेश संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से बिकवाली की है। एक्सचेंज के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, उन्होंने इस दौरान 34970 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।"

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने दिया बाजार को सहारा

उन्होंने कहा कि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी कर बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया है। सितंबर में FIIs ने भारतीय बाजार में 44010 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इस दौरान DIIs ने 76030 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। डीआईआई की खरीदारी से बाजार को सहारा मिला है।

अमेरिका-ईरान में समझौते पर अनिश्चतिता ने बढ़ाया दबाव

मुखर्जी ने कहा कि अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड, ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें और FIIs की बिकवाली का लगातार बाजार के सेंटिमेंट पर असर पड़ रहा है। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी दिख रही है। इसका खराब असर बाजार पर पड़ रहा है।

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अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार दिखी ऐसी गिरावट 

मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि सितंबर में निफ्टी 6.1 फीसदी गिरा है। यह निफ्टी में गिरावट का लगातार दूसरा महीना था। अक्तूबर 2024 के बाद पहली बार इस तरह की गिरावट दिखी है। 2026 में निफ्टी अब तक 13.4 फीसदी गिर चुका है। टेक्नोलॉजी, ऑटो, पीएसयू बैंक और कैपिटल गुड्स शेयरों में सितंबर में ज्यादा गिरावट आई। मार्केट की नजरें अब अगले हफ्ते पर लगी हैं।

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