Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने शेयर मार्केट पर ऐसा दबाव बनाया कि आज भी यह संभल नहीं पाया। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 700 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी 22600 के नीचे आ गया। बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि निचले स्तर पर खरीदारी यानी वैल्यू बाइंग के बावजूद इनके संभलने की कोशिश फेल हो गई। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का भारी दबाव रहा और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉल कैप 100 करीब 1-1% कमजोर हुए।
अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स की बात करें आज 29 सितंबर को निफ्टी और बैंक निफ्टी एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 242.65 प्वाइंट्स यानी 0.33% की गिरावट के साथ 72,529.07 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 64.05 प्वाइंट्स यानी 0.28% की फिसलन के साथ 22,716.20 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 707.72 प्वाइंट्स टूटकर 72,064.00 और निफ्टी भी 210.60 प्वाइंट्स गिरकर 22,569.65 तक आ गया था। निचले स्तर से रिकवर होकर सेंसेक्स 72,684.90 और निफ्टी 22,753.25 तक पहुंचा था, लेकिन ग्रीन होने से थोड़ी दूर रह गया।
Share Market Crash: ये है वजह
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने पर कच्चा तेल उबल पड़ा, जिससे मार्केट सहम गया। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल $100 के करीब पहुंच गया।
अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड उछलकर 5% के पार बनी हुई है, जिससे शेयर मार्केट में दबाव बढ़ा है।
एक कारोबारी दिन पहले 28 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने लगातार तीसरे दिन ताबड़तोड़ भारतीय स्टॉक मार्केट में बिकवाली की, जिसका दबाव आज दिख रहा है। सोमवार को विदेशी निवेशकों ने ₹5,353.22 करोड़ की नेट बिक्री की जबकि इससे पहले शुक्रवार 25 सितंबर को एफआईआई ने ₹3,693.93 करोड़ और गुरुवार 24 सितंबर को 5,027.36 करोड़ के नेट शेयर बेचे थे।
आईटी-रियल्टी सेक्टर में बिकवाली का भारी दबाव
सेक्टरलाइज फार्मा और मेटल को छोड़कर फिलहाल लगभग सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स लाल रहे। सबसे अधिक दबाव आईटी और रियल्टी सेक्टर ने बनाया। निफ्टी रियल्टी आज 2% से अधिक कमजोर हुआ तो निफ्टी आईटी भी करीब डेढ़ फीसदी नीचे आए। इसके अलावा एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स 1-1% से अधिक टूटे हैं। निफ्टी पीएसयू बैंक आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ।
आज निफ्टी और बैंक निफ्टी समेत एनएसई के अन्य इंडेक्सेज के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी थी और साथ ही एनएसई पर स्टॉक्स के भी F&O की मंथली एक्सपायरी थी, जिसका मार्केट पर दबाव दिखा। एक्सपायरी का मतलब है कि ट्रेडर्स को एनएसई पर सितंबर महीने की अपनी डेरिवेटिव पोजिशन को आज खत्म करना था।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।