Share Market Crash: शेयर बाजार इन 8 कारणों से लुढ़का, सेंसेक्स 1200 अंक टूटा, निफ्टी भी 25,200 के नीचे

Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला मंगलवार 20 जनवरी को भी जारी रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1220 अंकों से भी अधिक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी गिरकर 25,200 के भी नीचे आ गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों और ग्लोबल स्तर पर ट्रेड वॉर की बढ़ती आशंकाओं ने निवेशकों के मनोबल को कमजोर किया

अपडेटेड Jan 20, 2026 पर 3:27 PM
Share Market Down: मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 90.98 पर आ गया

Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला मंगलवार 20 जनवरी को भी जारी रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1220 अंकों से भी अधिक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी गिरकर 25,200 के भी नीचे आ गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों और ग्लोबल स्तर पर ट्रेड वॉर की बढ़ती आशंकाओं ने निवेशकों के मनोबल को कमजोर किया है। ब्रॉडर मार्केट में इससे भी तेज गिरावट देखने को मिली। बीएसई स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स 1.2 तक लुढ़क गए। सभी सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में थे।

दोपहर 3.20 बजे के करीब, बीएसई सेंसेक्स 1,223.27 अंक या 1.47 फीसदी गिरकर 82,022.91 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 402.60 अंक या 1.57 फीसदी टूटकर 25,182.90 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 8 बड़ी वजहें रहीं-


1. ग्लोबल ट्रेड वॉर से जुड़ी चिंताएं

अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर नई अनिश्चितता सामने आने के बाद ग्लोबल बाजारों में रिस्क लेने का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में तेजी और अमेरिका-यूरोप के बीच संभावित व्यापार तनाव बढ़ने की आशंकाओं ने ग्लोबल शेयर बाजारों में बिकवाली को हवा दी, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बताया कि अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड से जुड़े टैरिफ विवाद पर जब तक स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। उनके मुताबिक, भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मुद्दे निकट अवधि में बाजार की दिशा तय करते रहेंगे।

2. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली

सोमवार को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से 3,262 करोड़ रुपये की निकासी की। जनवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 29,315 करोड़ रुपये निकाल चुके है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने पूरे शेयर बाजार पर दबाव बनाए रखा और घरेलू निवेशकों की खरीदारी को सीमित कर दिया।

3. Q3 के मिले-जुले नतीजे

तिमाही नतीजों से जुड़े संकेत फिलहाल बाजार को कोई मजबूत दिशा देने में नाकाम रहे हैं। आईटी सेक्टर खास तौर पर दबाव में दिखा। Wipro के कमजोर आउटलुक के बाद सोमवार को उसके शेयरों में तेज गिरावट आई थी, जिसका असर मंगलवार को भी आईटी शेयरों पर बना रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1.1% फिसलकर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा। वीके विजयकुमार के मुताबिक, शुरुआती Q3 नतीजों से फिलहाल अर्निंग्स ग्रोथ में कोई साफ रिकवरी नहीं दिखी है। हालांकि ऑटो सेक्टर के नतीजों के साथ तस्वीर में सुधार आ सकता है।

4. कमजोर ग्लोबल संकेत

एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख दिखा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स हरे निशान में रहा, लेकिन जापान का निक्केई 225, शंघाई का SSE कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट में कारोबार करते दिखे। अमेरिकी बाजार सोमवार को हॉलिडे के चलते बंद रहे, लेकिन 20 जनवरी को वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स 1% से ज्यादा टूटते नजर आए।

5. रुपये में कमजोरी

मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 90.98 पर आ गया। आयातकों की मजबूत डॉलर मांग और लगातार विदेशी निवेश की निकासी ने भारतीय करेंसी पर दबाव बनाए रखा। फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कमजोर घरेलू शेयर बाजार के कारण रुपये पर दबाव जारी है।

6. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर अनिश्चितता

निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ पर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। विजयकुमार ने कहा कि अगर फैसला बाजार के अनुमान के उलट रहा, तो इसका असर ग्लोबल और घरेलू दोनों बाजारों की चाल पर दिख सकता है।

7. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव मंगलवार को 0.11% बढ़कर 64.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए महंगाई और राजकोषीय दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ाती हैं, जिससे शेयर बाजारों पर नेगेटिव असर पड़ता है।

8. निफ्टी का वीकली एक्सपायरी डे

मंगलवार को निफ्टी के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी होती है। ऐसे दिनों में डेरिवेटिव पोजीशनों की अनवाइंडिंग और रोलओवर के चलते बाजार में आमतौर पर ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, जिससे इंडेक्स में तेज इंट्राडे मूवमेंट होते हैं।

अब आगे क्या?

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि निफ्टी का हालिया निचले स्तरों के पास सपोर्ट लेने के बाद लोअर बोलिंजर बैंड के ऊपर लौटना एक पॉजिटिव संकेत है। हालांकि उन्होंने चेताया कि अगर इंडेक्स 25,550 के ऊपर टिकने में नाकाम रहता है, तो निकट अवधि में तेजी की गुंजाइश सीमित रह सकती है।

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