Share Markets: यह शॉर्ट टर्म निवेशकों के लिए खराब समय, लेकिन लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए निवेश का बड़ा मौका

जियोपॉलिटिकल टेंशन सहित किसी बड़ी क्राइसिस से शेयर बाजार में कुछ समय के लिए बड़ी गिरावट आती है। लेकिन, इसका असर लंबी अवधि में शेयर बाजार के प्रदर्शन पर नहीं पड़ता है। इतिहास बताता है कि हर बड़ी गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी आई है। 2020 में कोविड इसका उदाहरण है

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 2:30 PM
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करगील की लड़ाई और पुलवामा हमले के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव दिखा था। लेकिन, मिडियम और लॉन्ग टर्म में बाजार में तेजी आई थी।

बाजार में बड़ी गिरावट आने पर इनवेस्टर्स डर जाते हैं। कई निवेशक नए इनवेस्टमेंट पर ब्रेक लगा देते हैं तो कुछ घबराहट में अपने शेयर या म्यूचुअल फंड्स बेचना शुरू कर देते हैं। इस बार भी ऐसा हो रहा है। पहले एंथ्रोपिक के नए एआई टूल्स की वजह से बाजार में गिरावट आई। फिर 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद बाजार में बड़ी गिरावट आई है। सवाल है कि अभी इनवेस्टर्स को क्या करना चाहिए?

बड़ी क्राइसिस के बाद कुछ समय के लिए आती है गिरावट

Tata AIA Life Insurance की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे कई उदाहरण है, जो बताते हैं कि शेयर बाजार में इस तरह की अनिश्चितता लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बड़ा मौका होती है। जियोपॉलिटिकल टेंशन सहित किसी बड़ी क्राइसिस से शेयर बाजार में कुछ समय के लिए बड़ी गिरावट आती है। लेकिन, इसका असर लंबी अवधि में शेयर बाजार के प्रदर्शन पर नहीं पड़ता है। इतिहास बताता है कि हर बड़ी गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी आई है। 2020 में कोविड इसका उदाहरण है।


निवेशक अनिश्चितता की वजह से चिंतित हो जाते हैं

जियोपॉलिटिकल टेंशन सहित किसी क्राइसिस से बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टर्स अनिश्चितता से डरते हैं। कई बार पैनिक-सेलिंग या ऑटोमेटेड स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने से बाजार में बड़ी गिरावट आती है। इसका नतीजा यह होता है कि मजबूत यानी स्ट्रॉन्ग फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों की कीमतें भी नीचे आ जाती हैं, जिससे उनकी वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव हो जाती है।

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गोल्डन मौका 

टाटा एआईए का कहना है कि ऐसी स्थितियां बाजार में एंट्री का मौका देती हैं। खासकर यह उन निवेशकों के लिए बड़ा मौका होता है, जो लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। हालांकि, यह ध्यान में रखना होगा कि बाजार में रिकवरी आने में कभी कम तो कभी ज्यादा समय लगता है। इस बात की गारंटी नहीं कि रिकवरी कब आएगी।

कई बार बाजार ने गिरने के बाद दिया 30% रिटर्न

इंश्योरेंस कंपनी ने कुछ डेटा के आधार पर बताया है कि करगील की लड़ाई और पुलवामा हमले के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव दिखा था। लेकिन, मिडियम और लॉन्ग टर्म में बाजार में तेजी आई थी। इसी तरह इराक की लड़ाई और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे ग्लोबल इवेंट्स के बाद बाजार पर दबाव दिखा था। लेकिन, बाद में रिकवरी आई। कुछ मामलों में तो एसी घटनाओं के एक साल के अंदर बाजार ने 30 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिए।

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शॉर्ट टर्म के निवेशकों को फिलहाल बाजार से दूर रहने में फायदा

यह रिपोर्ट यह बताती है कि गिरावट वाले बाजार में इनवेस्टर्स को क्या करना चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक शॉर्ट टर्म के लिए निवेश करना चाहता है या लॉन्ग टर्म के लिए पैसे लगाना चाहता है। अभी बाजार का जो माहौल है, वह शॉर्ट टर्म के निवेशकों के लिए ठीक नहीं है। उन्हें फिलहाल बाजार से दूर रहना चाहिए। अगर कोई लंबी अवधि यानी 5-7 साल के लिए पैसे लगाना चाहता है तो यह बाजार में एंट्री का अच्छा मौका है।

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