पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। इसके बावजूद सरकार ने विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty (SAED) में कोई संशोधन नहीं किया है। विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को आमतौर पर विंडफॉल टैक्स (windfall tax) के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर, विंडफॉल टैक्स को हर पखवाड़े संशोधित किया जाता है। इसमें नवीनतम अपडेट 15-16 मार्च के बीच होने की उम्मीद थी। हालांकि खबर लिखे जाने तक सरकार की ओर से कोई अपडेट नहीं आया है। विंडफॉल टैक्स में संशोधन पर कोई अपडेट नहीं होना इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पिछले दो हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है। ब्रेंट और नायमैक्स क्रूड दोनों के दाम 12 प्रतिशत से ज्यादा गिरे हैं। रुपये के लिहाज से कीमतों में भी काफी करेक्शन देखा गया है।
महीने की शुरुआत में एक बैरल कच्चे तेल का भाव 6,500 रुपये था जबकि वर्तमान में एक बैरल कच्चे तेल की कीमत 5,700 रुपये है। इस गिरावट को देखते हुए, घरेलू कच्चे तेल, एटीएफ और डीजल पर विंडफॉल टैक्स को आदर्श रूप से कम संशोधित करके घटा दिया जाना चाहिए था। हालांकि इसमें अपडेट नहीं आने से उद्योग को अनिश्चितता की स्थिति में पहुंच गया है।
इससे पहले 3 मार्च को घोषित संशोधन में सरकार ने कच्चे पेट्रोलियम पर विंडफॉल टैक्स को 4,350 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 4,400 रुपये कर दिया था। जबकि एटीएफ और डीजल के लिए इसे क्रमशः शून्य और 0.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क शून्य रहेगा।
15-28 फरवरी के बीच ब्रेंट और नाइमेक्स में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह फैसला लिया गया है। 2023 में अब तक कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स में 500 रुपये प्रति टन, डीजल पर 5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ में 1 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों को हुआ है। इंडियन ऑयल (Indian Oil), एचपीसीएल (HPCL) और बीपीसीएल (BPCL) के शेयरों में पिछले सप्ताह 1 से लेकर 8 प्रतिशत की में वृद्धि हुई।