मशूहर अमेरिकी इनवेस्टर और फंड मैनेजर पीटर लिंच (Peter Lynch) ने कहा था कि करीब हर व्यक्ति के पास शेयर बाजार से कमाई के लिए दिमाग है। सवाल यह है कि क्या आप इसके लिए तैयार हैं और आप थोड़ी मेहनत कर सकते हैं? घरेलू शेयर बाजार में लगातार सातवें दिन तेजी देखने को मिली। यह पिछले कुछ महीनों में तेजी का सबसे लंबा सिलसिला है। इसलिए कुछ सावधानी जरूरी हो गई है। डीलर्स का कहना है कि ट्रेडिंग वॉल्यूम अब भी काफी कम है। अगले कुछ सत्रों में फोकस आईटी शेयरों पर रहने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि TCS और Infosys अपने तिमाही नतीजों का ऐलान करने जा रही हैं।
Lemon Tree ने नेपाल में दो होटलों के फ्रैंचाइजी एग्रीमेंट किए हैं। दोनों होटलों में रूम की कुल संख्या 183 है। एक महीने से कम समय में लेमन ट्री की तरफ से यह ऐसा चौथा ऐलान है। इससे पहले कंपनी ने बेंगलुरु, केरल और राजस्थान में रूम की सख्या बढ़ाने के ऐलान किए थे। लेकिन, इसका असर लेमन ट्री के शेयरों पर नहीं पड़ा है। ऐसा करीब दूसरे सभी होटल शेयरों के साथ है। मैनेजमेंट के होटल रूम्स के हायर रेट्स और अच्छी डिमांड के संकेत देने के बावजूद शेयरों पर असर नहीं दिखा है। हॉस्पिटलिटी सेक्टर के बुल्स का कहना है कि होटल कंपनियों के शेयर कंसॉलिडेशन फेज में हैं। उसके बाद इनमें तेजी आएगी।
Internet Fund ने Delhivery के 1.18 करोड़ शेयर औसत 330 रुपये के प्राइस पर मंगलवार को बेचे हैं। यह इस वेंचर कैपिटल फंड की दूसरी बड़ी बिकवाली है। अभी एक महीना नहीं हुआ है जब उसने 55 लाख शेयर बेचे थे। दोनों बिकवाली में यह डिसक्लोजर नहीं आया कि आखिर किसने ये शेयर खरीदे। ऐसा लगता है कि हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) का एक समूह इन शेयरों में अपना इनवेस्टमेंट बढ़ा रहा होगा। अक्टूबर में प्रॉफिट वार्निंग के बाद हुई बिकवाली से अब तक दिल्लीवेरी के शेयर उबर नहीं पाए हैं। हालांकि, कुछ प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने इस शेयर के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है।
Delta Corp के चौथी तिमाही के नतीजों ने निराश किया है। तिमाही दर तिमाही आधार पर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन, रेवेन्यू और प्रॉफिट में तेज गिरावट देखने को मिली है। यह शेयर मशूहर स्टॉक इनवेस्टर राकेश झुनझुनवाला का फेवरेट था। पिछले साल जून तिमाही में झुनझुनवाला के इस कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच देने के बाद से इस शेयर में गिरावट देखने को मिली है। Delta Corp मार्केट में ऐसे कुछ शेयरों के उदाहरण में शामिल है, जिनमें दिग्गज निवेशकों के इनवेस्टमेंट के बावजूद शेयर की कीमतों पर असर नहीं पड़ा है। ज्यादातर इनवेस्टर्स ने बगैर खास रिटर्न के इन शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बेच दी।
क्या अमेरिका में बैंकिंग क्राइसिस खत्म हो गई है? इस सवाल को लेकर बहस जारी है। IMF के चीफ इकोनॉमिस्ट Pierre-Olivier Gouricnhas ने सीएनबीसी को बताया, "हमने बैंकिंग सेक्टर खासकर अमेरिका में जो कुछ देखा है, उससे चिंतित हैं। इसका 2023 में ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।" उन्होंने कहा कि दुनियाभर में बैंक अब सावधानी बरतेंगे। वे लोन देने में सख्ती करेंगे। इसका असर इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ेगा। इसस पहले मशहूर इकोनॉमिस्ट Nouriel Roubini भी कह चुके हैं कि जल्द हम कुछ और बैंकों को संकट में देख सकते हैं। उनका यह भी कहना है कि इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने और क्रेडिट ग्रोथ घटने से रिसेशन की स्थिति बन सकती है। इससे ज्यादा नॉन-परफॉर्मिंग लोन और डिफॉल्ट देखने को मिल सकते हैं। यह इकोनॉमी के लिए बहुत खराब होगा।