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Short Call: मध्यपूर्व क्राइसिस और चीन में तेजी से क्या इंडियन मार्केट में बुलरन पर ब्रेक लग जाएगा, Dabur India और Petronet LNG क्यों सुर्खियों में हैं?

इंडिय मार्केट्स में पिछले छह सत्रों में जिस तरह की गिरावट आई है, उसने निवेशकों को हिला दिया है। हालांकि, इंडियन मार्केट में बड़ी गिरावट की आशंका पहले से जताई जा रही थी। मध्यपूर्व संकट, चीन के स्टॉक मार्केट में तेजी और एफएंडओ के नए नियमों से इंडियन मार्केट को गिरने की वजह मिल गई

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 04, 2024 पर 9:52 AM
Short Call: मध्यपूर्व क्राइसिस और चीन में तेजी से क्या इंडियन मार्केट में बुलरन पर ब्रेक लग जाएगा, Dabur India और Petronet LNG क्यों सुर्खियों में हैं?
अगर क्रूड ऑयल का भाव 80-90 डॉलर प्रति बैरल के बीच में रहता है तो इंडिया का Trade Deficit (व्यापार घाटा) FY25 में 266 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

इंडियन मार्केट 3 अक्टूबर को क्रैश कर गया। मार्केट में बड़ी गिरावट की आशंका पहले से थी। मिडिलईस्ट क्राइसिस, एफएंडओ के नए नियम और चीन के स्टॉक मार्केट्स में आई तेजी से इंडियन मार्केट्स को गिरने की वजह मिल गई। फिलहाल, इंडिया सहित दुनियाभर के मार्केट्स के लिए मिडिलईस्ट क्राइसिस बड़ा खतरा बना हुआ है। जेफरीज के क्रिस वुड ने कहा है कि अगर जियोपॉलिटिकल हालात बिगड़ते हैं तो इंडिया और दुनियाभर के बाजारों में बड़ी गिरावट आएगी।

सबसे ज्यादा चिंता ऑयल (Crude Oil Price) की बढ़ती कीमतों की वजह से है। अगर इजराइल (Israel) ईरान (Iran) के तेल के ठिकानों को निशाना बनाता है तो इससे क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान में पहुंच सकती हैं। यह इंडिया जैसे ऑयल इंपोर्ट करने वाले कंपनियों के लिए बहुत खराब होगा। इंडिया में व्यापार घाटा बहुत बढ़ सकता है।

ICICI Bank ने हाल में अपनी रिपोर्ट में इस बारे में बताया है। उसने कहा है कि अगर क्रूड ऑयल का भाव 80-90 डॉलर प्रति बैरल के बीच में रहता है तो इंडिया का Trade Deficit (व्यापार घाटा) FY25 में 266 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ऑयल के 10 डॉलर और चढ़ने पर ट्रेड डेफिसिट 276 अरब डॉलर तक जा सकता है। जहां तक स्टॉक मार्केट की बात है तो इंडिया में अभी बुलरन खत्म नहीं हुआ है। Morgan Stanley के रिद्धम देसाई का कहना है कि इंडिया में बुलरन ने अभी अपना आधा सफर तय किया है। देसाई का यह मानना रहा है कि बड़ी गिरावट से बाजार में हलचल होती है, लेकिन निवेशकों के लिए निवेश का मौका भी होता है।

एनालिस्ट्स का कहना है कि निवेशकों को अभी सावधान रहने की जरूरत है। फार्मा और एफएमसीजी जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स में निवेश किया जा सकता है। विदेशी निवेशक इंडिया से पैसा निकालकर चीन के स्टॉक्स मार्केट्स में लगा रहे हैं। उन्हें हांगकांग में वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लग रही है। इससे इंडियन मार्केट्स पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में मार्केट में किसी तरह की गलती की गुंजाइश नहीं रह गई है। निवेशकों को सोचसमझ कर फैसले लेने की जरूरत है।

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