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Short Call: म्यूचुअल फंडों ने अगस्त में 35600 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जानिए Stove Kraft और Max Healthcare क्यों सुर्खियों में हैं

बाजार में लिक्विडिटी काफी ज्यादा है। हर महीने 20,000 करोड़ रुपये का नया निवेश आ रहा है। म्यूचुअल फंड हाउसेज नई थीम पर NFO लॉन्च कर रहे हैं। फंड मैनेजर्स कमजोर प्रदर्शन वाले स्टॉक्स से पैसा निकालकर अच्छे प्रदर्शन वाले स्टॉक्स में लगा रहे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 17, 2024 पर 10:10 AM
Short Call: म्यूचुअल फंडों ने अगस्त में 35600 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जानिए Stove Kraft और Max Healthcare क्यों सुर्खियों में हैं
स्टोव क्राफ्ट का शेयर 16 सितंबर को 7.7 फीसदी उछाल के साथ 938.10 रुपये पर बंद हुए। ब्रोकरेज फर्म Emkay ने Stove Kraft के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है।

म्यूचुअल फंडों ने अगस्त में जमकर खरीदारी की। उन्होंने 35,600 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 2,700 करोड़ रुपये की बिकवाली की। बाजार में हर महीने करीब 20,000 करोड़ रुपये आ रहे हैं। म्यूचुअल फंड हाउसेज नई थीम पर न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) लॉन्च कर रहे हैं। भरपूर लिक्विडिटी की वजह से पहली बार ऐसी खरीदारी दिख रही है। कई सेक्टर्स और स्टॉक्स में अच्छी ग्रोथ दिखी है। फंड मैनेजर्स कमजोर प्रदर्शन वाले स्टॉक्स से पैसे निकालकर अच्छी ग्रोथ वाले स्टॉक्स में लगा रहे हैं। इससे तेजी को सपोर्ट मिल रहा है।

लार्जकैप स्टॉक्स में Zomato, TCS, Trent और Maruti Suzuki में निवेशकों की ज्यादा दिलचस्पी दिख रही है। म्यूचुअल फंडों ने अदाणी समूह की कंपनियों के 4,200 करोड़ रुपये के स्टॉक्स खरीदे हैं। अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में भी 900 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। मिडकैप स्टॉक्स में Kalyan Jewellers, Delhivery, Mphasis में म्यूचुअल फंडों ने खरीदारी की है। स्मॉलकैप स्टॉक्स में Zen Technologies, Aster DM Health में खरीदारी दिखी है। NACL और Laurus Labs के शेयरों में बिकवाली दिखी है।

Stove Kraft

स्टोव क्राफ्ट का शेयर 16 सितंबर को 7.7 फीसदी उछाल के साथ 938.10 रुपये पर बंद हुए। ब्रोकरेज फर्म Emkay ने Stove Kraft के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। बुल्स का मानना है कि स्टोव क्राफ्ट की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव है। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है। कंपनी अपने डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का विस्तार कर रही है। उसने ई-कॉमर्स और मॉडर्न रिटेल पर भी फोकस बढ़ाया है। इससे लंबी अवधि में स्टॉक की दोबारा रेटिंग हो सकती है। उधर, बेयर्स की दलील है कि कैपेक्स साइकिल खत्म होने जा रही है और इंपोर्ट के मोर्चे पर कमजोर तस्वीर का असर कंपनी की रिरेटिंग पर पड़ सकता है।

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