यह ऐसा मार्केट है, जिसमें रिटेल इनवेस्टर्स पर सतर्कता बरतने की सलाह का कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है। इससे शेयरों की वैल्यूएशन काफी बढ़ गई है। उधर, सेबी लगातार एसएमई सेगमेंट से जुड़े रिस्क को लेकर आगाह कर रहा है। लेकिन, रिटेल इनवेस्टर्स सुनने को तैयार नहीं हैं। प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों ही मार्केट में वैल्यूएशन काफी हाई लेवल पर पहुंच गई है। प्रोफेशनल इनवेस्टर्स धीरे-धीरे इस मार्केट के साथ तालमेल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मार्केट जिस तरह से हर चिंता को पीछे छोड़ आगे बढ़ता जा रहा है, उससे प्रोफेशनल इनवेस्टर्स भी हैरान हैं। हालांकि मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि मार्केट ने तेजी का अभी आधा ही सफर पूरा किया है।
ग्लोबल मार्केट्स (Global Markets) से खतरे के संकेत मिल रहे हैं। इसकी वजह ग्रोथ सुस्त पड़ने को लेकर चिंता है। इसका असर मार्केट पर पड़ेगा। ग्रोथ की बात करें तो इंडिया में भी ऐसी ही स्थिति है। कोविड के बाद पहली बार अगर ग्रोथ की रफ्तार सुस्त पड़ती है और सरकार के खर्च करने की रफ्तार में कमी आती है तो इसका असर मार्केट पर पड़ना तय है। निवेशक इससे चिंतित हैं। हालांकि, यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे मार्केट में जरूरी करेक्शन आने वाला है। हालांकि, मॉर्गन (Morgan Stanley) स्टेनली ने खुद को ऐसी स्थिति के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। उसका मानना है कि यह उन निवेशकों के लिए सुनहरा मौका होगा, जो अब तक निवेश के लिए मौके का इंतजार कर रहे थे।
कोल इंडिया का शेयर 4 सितंबर को 3 फीसदी गिरकर 505 रुपये पर बंद हुआ। दरअसल ब्रोकरेज फर्म Nuvama ने Coal India के शेयरों का टारगेट प्राइस 567 रुपये से घटाकर 542 रुपये कर दिया है। हालांकि, बुल्स ने जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि पावर की रिकॉर्ड डिमांड और थर्मल पावर की क्षमता बढ़ाने पर फिर से फोकस को देखते हुए कंपनी के लिए अच्छी संभावना दिखती है। कोल इंडिया ने मिनिस्ट्री ऑफ कोल से समझौते में 908 MT उत्पादन का टारगेट तय किया है। यह FY25 में सरकार की तरफ से तय 838 MT के टारगेट से ज्यादा है। उधर, बेयर्स की दलील है कि कंपनी का उत्पादन अगस्त में 46.1 MT रहा है। यह साल दर साल आधार पर 12 फीसदी कम है। दरअसल, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में उत्पादन पर बारिश का असर पड़ा है।
यह भी पढ़ें: Zomato के शेयर में आ सकती है 40% तेजी! जेपी मॉर्गन ने बढ़ाया टारगेट प्राइस, कीमत 7% तक उछली
हिंदुस्तान पेट्रोलियम के शेयर 4 सितंबर को 4.4 फीसदी चढ़कर 444.75 रुपये पर बंद हुए। दरअसल, ब्रेंट क्रूड के प्राइस में कमी का असर कंपनी के शेयरों पर पड़ा है। इससे Hindustan Petroleum के शेयर का प्राइस 52 हफ्ते के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया है। बुल्स का कहना है कि अगर FY25 में क्रूड की कीमतें नरमी रहती हैं तो यह कंपनी के लिए पॉजिटिव होगा। एचएसबीसी का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में सरकार के हस्तक्षेप करने की उम्मीद नहीं है। इससे कंपनी का मार्जिन अच्छा बना रहेगा। बेयर्स की दलील है कि अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ पर पड़ सकता है।