Short Call: कनाडा से रिश्ते बिगड़ने के बाद क्या कनाडाई इनवेस्टर्स इंडियन मार्केट्स से पैसे निकाल सकते हैं? जानिए Rallis India, BSE क्यों सुर्खियों में हैं

सितंबर 2024 में इंडियन स्टॉक मार्केट्स में कनाडा के निवेशकों का इनवेस्टमेंट करीब 2 लाख करोड़ रुपये का था। कनाडा के पेंशन फंडों ने ज्यादातर सुरक्षित माने वाले एसेट्स में निवेश किया है। यह निवेश लंबी अवधि का है। पिछले कुछ सालों में कनाडा से निवेश लगातार बढ़ा है

अपडेटेड Oct 17, 2024 पर 1:22 PM
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कनाडा और भारत के रिश्ते पिछले साल सितंबर से बिगड़ने शुरू हो गए थे, जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हुई हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप लगाया था।

कनाडा और भारत के रिश्तों में काफी तल्खी आ गई है। दोनों देशों के रिश्ते पिछले साल सितंबर से बिगड़ने शुरू हो गए थे, जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हुई हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप लगाया था। भारत लगातार इस आरोप को बेतुका बताता रहा है। इस बीच, इंडिया में कनाडा के निवेश पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है बल्कि इसमें इजाफा हुआ है। सितंबर 2024 में इंडियन स्टॉक मार्केट्स में कनाडा के निवेशकों का इनवेस्टमेंट करीब 2 लाख करोड़ रुपये का था। सवाल है कि पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के एक दूसरे के राजनयिकों को देश छोड़ने के आदेशों के बाद भारत में कनाडा के निवेश पर असर पड़ेगा?

कनाडा के पेंशन फंडों में किया है बड़ा निवेश

NSDL के डेटा के मुताबिक, अब तक इंडिया में कनाडाई निवेशकों के इनवेस्टमेंट पर असर नहीं पड़ा है। वे खुलकर इंडिया में निवेश कर रहे हैं। मई में आई एशिया पैसेफिक फाउंडेशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि कनाडा के पेंशन फंड इंडिया में सेफ और स्टेबल में निवेश कर रहे हैं। रियल एस्टेट, इंडस्ट्रियल ट्रांसपोर्टेशन और फाइनेंशियल सर्विसेज को आम तौर पर स्टेबल एसेट माना जाता है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2008 से 2023 के दौरान कनाडाई पेंशन फंडों ने इंडिया में अपना 60 फीसदी निवेश इन्हीं एसेट में किया है। यह लंबी अवधि का निवेश है। फिलहाल इस निवेश पर कनाडा के साथ रिश्तों में आई तल्खी का असर नहीं दिखा है।


Rallis India

रैलिज इंडिया के शेयरों में 16 अक्टूबर को 14 फीसदी उछाल आया। इसकी वजह कंपनी के दूसरी तिमाही के नतीजे हैं, जो उम्मीद से बेहतर हैं। रेवेन्यू और प्रॉफिट जैसे अहम मोर्चों पर कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा है। बुल्स का कहना है कि केमिकल कंपनियों के लिए दूसरी तिमाही में हालात बेहतर होते दिखे हैं। अगर घरेलू मांग में रिकवरी आती है तो इससे कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ बढ़ेगी। एलारा कैपिटल ने कहा है कि पहले भी कई बार Rallis India ने उम्मीद जगाई है। लेकिन वह पूरी नहीं हुई है। इसलिए कंपनी के गाइडेंस और नए मैनेजमेंट के उसे हासिल करने पर मार्केट की करीब नजरें रहेंगी। इसका असर कंपनी के शेयरों पर भी पड़ेगा।

BSE

बीएसई के शेयरों में 16 अक्टूबर को गिरावट देखने को मिला। कारोबार के अंत में शेयर 5.4 फीसदी की गिरावट के साथ 4,495 रुपये पर बंद हुए। इसकी वजह जेफरीज की रिपोर्ट है। उसने BSE की डाउनग्रेड कर दिया है। इसे 'अंडरपरफॉर्म' की रेटिंग दी है। बुल्स का कहना है कि F&O के सेबी के नियम उतने सख्त नहीं हैं, जितनी आशंका थी। एक्सपपर्ट्स का कहना है कि नए नियमों का ज्यादा असर प्रतिद्वंद्वी एक्सचेंज NSE पर पड़ेगा। बीएसई को इसका फायदा हो सकता है। बेयर्स का कहना है कि हाल में बीएसई के शेयरों में तेजी की वजह इसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद थी। सेबी के एफएंडओ के नए नियम आने के बाद से बीएसई का शेयर 100 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। इसका पी/ई 40 गुना हो चुका है। यह वैल्यूएशन काफी ज्यादा दिखती है।

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Bharti Airtel

भारती एयरटेल के शेयरों में 16 अक्टूबर को 1 फीसदी की मजबूती आई। इसकी वजह एचएसबीसी की रिपोर्ट है। उसने स्टॉक को खरीदने की सलाह दी है। पहले उसने Bharti Airtel के शेयर को 'होल्ड' रेटिंग दी थी। बुल्स का कहना है कि FY24-27 के दौरान एयरटेल का EBITDA/EPS की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 16%/78% रह सकता है। इसमें मोबाइल एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर (एआरपीयू) का बड़ा हाथ होगाो। कंपनी ब्रॉडबैंड में भी अच्छी ग्रोथ दिखा रही है। इससे मार्जन बढ़ने की उम्मीद है।

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