SME स्टॉक्स भी आएंगे ASM और TFT के दायरे में, जानिए क्या है इसका मतलब?

ASM का मतलब है Additional Surveillance Measure (ASM)। यह सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों का एक सिस्टम है, जिसका मकसद निवेशकों के हितों की सुरक्षा है। ASM के तहत आने वाले स्टॉक्स की मॉनिटिरिंग बढ़ा दी जाती है। कुछ शर्तों के पूरी होने पर उन्हें ट्रेड-फॉर-ट्रेड (TFT) कैटेगरी में डाल दिया जाता है। TFT सेगमेंट में सिर्फ डिलीवरी वाले स्टॉक्स को रखने की इजाजत है

अपडेटेड Sep 26, 2023 पर 2:40 PM
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BSE SME IPO Index में 60 SME के स्टॉक्स शामिल हैं। यह एसएमई स्टॉक्स का प्रतिनिधित्व करने वाला सूचकांक है। इस इंडेक्स ने पिछले 10 साल में 10,350 फीसदी रिटर्न दिया है।

स्टॉक एक्सचेंजों और SEBI ने 25 सितंबर की शाम बताया कि ASM और TFT फ्रेमवर्क के दायरे में स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (SME) के स्टॉक्स भी आएंगे। हालांकि, इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं। SME शेयरों की कीमतों में लगातार उछाल को देखते हुए इसकी उम्मीद पहले से जताई जा रही थी। इन स्टॉक्स में लगातार तेजी की वजह से हेराफेरी (Manipulation) की आशंका भी बढ़ी है। निवेशकों के बीच इन शेयरों को लेकर काफी क्रेज दिख रहा है। एएसएम और टीएफटी फ्रेमवर्क के तहत ऐसे स्टॉक्स की पहचान की जाती है, जिनमें कुछ ट्रेडर्स कीमतें चढ़ाने के लिए शेयरों को आपस में ही खरीदते और बेचते हैं। आइए पहले यह समझने की कोशिश करते हैं कि यह पूरा सिस्टम क्या है। इससे आपके लिए समझना आसान हो जाएगा कि सेबी और एक्सचेंजों ने क्यों यह फैसला लिया है।

ASM का मतलब क्या है?

ASM का मतलब है Additional Surveillance Measure (ASM)। यह सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों का एक सिस्टम है, जिसका मकसद निवेशकों के हितों की सुरक्षा है। ASM के तहत आने वाले स्टॉक्स की मॉनिटिरिंग बढ़ा दी जाती है। कुछ शर्तों के पूरी होने पर उन्हें ट्रेड-फॉर-ट्रेड (TFT) कैटेगरी में डाल दिया जाता है। TFT सेगमेंट में सिर्फ डिलीवरी वाले स्टॉक्स को रखने की इजाजत है। सेबी के इस सिस्टम का मकसद शेयरों में बहुत ज्यादा स्पेकुलेशन को रोकना भी है। कुछ एसएमई शेयरों में आई तेजी ने एनालिस्ट्स को भी हैरान किया है।


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बहुत ज्यादा सट्टेबाजी की आशंका

हाल में आए कुछ आईपीओ को मैनेज करने वाले एक मर्चेंट बैंकर ने भी नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह माना कि SME सेगमेंट में बहुत ज्यादा स्पेकुलेशन है। सेबी का भी ऐसा ही मानना है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि SME स्टॉक्स में Manipulation आसान है। इसकी कई वजहें हैं। एसएमई शेयरों का लो फ्लोट, कम लिक्विडिटी, मौका चूकने का डर (FOMO) और सोशल मीडिया पर इन शेयरों के बारे में होने वाली चर्चा की वजह से इनमें सट्टेबाजी आसान हो जाती है।

सट्टेबाजी से छोटे निवेशकों को ज्यादा नुकसान

हालांकि, हर कोई इस आशंका से सहमत नहीं हैं कि SME स्टॉक्स में बहुत ज्यादा सट्टेबाजी हो रही है। दिल्ली इनवेस्टर्स एसोसिएशन के कनवेनर जी नागपाल ने बताया कि यह सच है कि मार्केट में कुछ ऐसे तत्व हैं जो चीजों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। लेकिन, हर स्टॉक्स में ही ऐसा हो रहा है, यह कहना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि रिटेल इनवेस्टर्स को शेयरों में तेज गिरावट आने पर ज्यादा नुकसान होता है। उन पर ऐसे शेयरों में निवेश करने पर रोक लगनी चाहिए। उधर, क्यूआईबी और स्मार्ट इनवेस्टर्स को बगैर किसी पाबंदी के इन शेयरों में निवेश करने की इजाजत होनी चाहिए।

स्मार्ट इनवेस्टर्स के पास रिस्क लेने की क्षमता

नागपाल ने कहा, "क्यूआईबी अनुभवी इनवेस्टर्स होते हैं, जो ज्यादा रिस्क लेते हैं। इसलिए उन्हें उसका फायदा भी मिलता है। उन्हें पता है कि वे क्या कर रहे हैं।" कुछ दूसरे एक्सपर्ट्स का यह कहना है कि एसएमई स्टॉक्स में सिर्फ क्यूआईबी को निवेश की इजाजत देने से छोटी कंपनियों के लिए रिटेल मार्केट का आकर्षण खत्म हो जाएगा। इससे रिटेल निवेशकों को तेजी से बढ़ते SME सेगमेंट का फायदा उठाना का मौका भी नहीं मिलेगा। इसलिए, ऐसे किसी उपाय को लागू करने से बचना चाहिए, जो रिटेल इनवेस्टर्स के निवेश पर रोक लगाए।

BSE SME IPO Index का रिटर्न 10350 फीसदी

BSE SME IPO Index में 60 SME के स्टॉक्स शामिल हैं। यह एसएमई स्टॉक्स का प्रतिनिधित्व करने वाला सूचकांक है। इस इंडेक्स ने पिछले 10 साल में 10,350 फीसदी रिटर्न दिया है। इसकी ग्रोथ सालाना 59 फीसदी रही है। इसका मतलब है कि 2013 में 1,000 रुपये का निवेश 2023 में आज 1.03 लाख रुपये हो गया होता। पिछले पांच साल में इस इंडेक्स का रिटर्न सालाना 82.63 फीसदी रहा है।

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