South Korea Share Market: दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में 8 जुलाई को भी बड़ी गिरावट दिखी। जून में अपने ऑल-टाइम हाई से 20 फीसदी गिरने के बाद यह बाजार अब बेयर मार्केट में प्रवेश कर गया है। 7 जुलाई को बाजार का प्रमुख सूचकांक कोस्पी 8 फीसदी से ज्यादा गिर गया था। 8 जुलाई को भी कोस्पी पर दबाव दिखा। भारतीय समय के मुताबिक, 11 बजे यह 4.14 फीसदी गिरकर 7,329 अंक पर चल रहा था।
दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरावट ने बनाया दबाव
8 जुलाई को दिग्गज कंपनियों में गिरावट ने दक्षिण कोरिया के बाजार पर दबाव बढ़ाया। चिप बनाने वाली दोनों बड़ी कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हायनिक्स में बड़ी गिरावट दिखी। 11 बजे सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर 5.41 नीचे चल रहा था। SK Hynix का शेयर 2.68 फीसदी नीचे था। Hyundai Motor का शेयर भी 4 फीसदी से ज्यादा नीचे चल रहा था।
मध्यूपूर्व में फिर से तनाव बढ़ने का असर
मध्यूपूर्व में एक बार फिर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ा है। इसका असर भारत सहित दूसरे एशियाई बाजारों पर 8 जुलाई को देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड में उछाल का असर भी एशियाई बाजारों पर पड़ा। जापान, चीन और थाईलैंड के बाजारों में गिरावट दिखी। MSCI Asia Pacific Index करीब 1 फीसदी नीचे चल रहा था। इस साल दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में सबसे ज्यादा तेजी आई थी।
अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट का भी असर
7 जुलाई को अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट दिखी। सबसे ज्यादा गिरावट टेक्नोलॉजी शेयरों में आई थी। इससे नैस्डेक लाल निशान में बंद हुआ था। बाकी दोनों सूचकांक डाओ जोंस और एसएंडपी 500 भी गिरकर बंद हुए थे। इसका असर भी 8 जुलाई को एशिया में टेक्नोलॉजी शेयरों पर दिखा। पिछले कुछ हफ्तों से टेक्नोलॉजी खासकर एआई से जुड़े शेयरों पर दबाव दिख रहा है।
स्थिति पर नजर रख रही दक्षिण कोरिया की सरकार
दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में बीते कुछ हफ्तों में आई गिरावट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। वित्तमंत्री शेयर बाजारों के लिए रिस्क बढ़ाने वाले फैक्टर्स पर विचार करने के लिए तैयार हैं। सरकार ने 7 जुलाई को यह बताया।
विदेशी निवेशक कर रहे बड़ी बिकवाली
दक्षिण कोरिया के वित्तमंत्री ने केंद्रीय बैंक के गवर्नर और फाइनेंशियल रेगुलेटर्स के प्रमुखों से भी मुलाकात की है। दक्षिण कोरिया स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक कोस्पी में चिप बनाने वाली दोनों कंपनियों की करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों शेयरों में विदेशी इनवेस्टर्स की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।