Cochin Shipyard OFS: कोचिन शिपयार्ड का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 8 जुलाई को खुल गया। 7 जुलाई के लिए यह ओएफएस नॉन-रिटेल इनवेस्टर्स के लिए खुला था। इस कैटेगरी में इसे इनवेस्टर्स का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। हालांकि, कंपनी के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। कल भी शेयर में बड़ी गिरावट आई थी।
सरकार बेच रही अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी
सरकार विनिवेश कार्यक्रम के तहत कोचिन शिपयार्ड में 5.04 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। वह ओएफएस में 13.2 लाख शेयर बेचेगी। सरकार की यह कंपनी शिप यानी समुद्री जहाज बनाती है। मार्च तिमाही के आखिर में कोचिन शिपयार्ड में सरकार की 67.91 फीसदी हिस्सेदारी थी। नॉन-रिटेल इनवेस्टर्स कैटेगरी में यह ओएफएस 7 जुलाई को 3.52 गुना सब्सक्राइब हुआ। इससे सरकार अतिरिक्त 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के ग्रीन-शू ऑप्शन का इस्तेमाल करेगी।
प्रति शेयर 1400 रुपये का फ्लोर प्राइस तय
ग्रीन-शू ऑप्शन मिलाकर इस डिफेंस कंपनी में 5.04 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचेगी। सरकार ने ओएफएस के लिए प्रति शेयर 1,400 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया है। फ्लोर प्राइस का मतलब उस मिनिमम प्राइस से है, जिस पर इनवेस्टर्स बोली लगा सकते हैं। कोचिन शिपयार्ड शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है।
आज कोचिन शिपयार्ड के शेयरों में गिरावट
कोचिन शिपयार्ड का शेयर 8 जुलाई को 10:22 बजे 2.28 फीसदी गिरकर 1,412 रुपये पर चल रहा था। बीते एक हफ्ते में यह शेयर 6 फीसदी से ज्यादा गिरा है। इस वजह से ओएफएस में तय फ्लोर प्राइस और शेयर के मौजूदा प्राइस के बीच ज्यादा फर्क नहीं रह गया है। सरकार को इस कंपनी में हिस्सेदारी बेचने से करीब 1,800 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
विनिवेश से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य
सरकार ने इस वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट रखा है। 21 मई तक सरकार ने विनिवेश से 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा लिए थे। जून में सरकार ने कई कंपनियों का ओएफएस पेश किया था। इनमें कोल इंडिया, एनएलसी इंडिया, एनएचपीसी, आईआरएफसी, जीआईसी शामिल थीं। कोचिन शिपयार्ड का शेयर 7 जुलाई को 5 फीसदी गिरकर 1,430.7 रुपये पर बंद हुआ था।
ऐसे ओएफएस में खरीद सकते हैं शेयर?
रिटेल इनवेस्टर्स अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या ब्रोकर ऐप के ओएफएस सेक्शन के जरिए इस ओएफएस में बोली लगा सकते हैं। इश्यू की डिटेल देखने के बाद आप फ्लोर प्राइस या इससे ज्यादा कीमत पर बोली लगा सकते हैं। इसके लिए आपके ट्रेडिंग अकाउंट में पर्याप्त पैसा होना चाहिए। शेयरों का ऐलॉटमेंट होने तक पैसा ब्लॉक हो जाएगा। जिन इनवेस्टर्स को सेटलमेंट डेट पर शेयर एलॉट होंगे, उनके डीमैट अकाउंट में वे दिखाई देंगे। अगर किसी इनवेस्टर को शेयर एलॉट नहीं होते हैं तो उसका पैसा वापस हो जाएगा।