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Stock in Focus: मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से मिला ₹279 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट, 21 सितंबर को शेयर फोकस में

Stock in Focus: मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से ₹233 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट पर इस कंपनी के शेयरों में सोमवार 21 सितंबर को तेज हलचल दिख सकती है। कंपनी के लिए यह तीसरा ग्रीन टग कॉन्ट्रैक्ट है। जानिए इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी को क्या काम करना है और इसके शेयरों की एक साल में चाल कैसी रही है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Sep 20, 2026 पर 2:27 PM
Stock in Focus: मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से मिला ₹279 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट, 21 सितंबर को शेयर फोकस में
Knowledge Marine को मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से ₹279.33 करोड़ का तीसरा ग्रीन टग कॉन्ट्रैक्ट (Green Tug Contract) मिला है।

Knowledge Marine Share Price: इंटीग्रेटेड मरीन इंफ्रा और ड्रेजिंग फर्म नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग को मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से ₹279 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने शनिवार 19 सितंबर को एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी है। ऐसे में अब सोमवार 21 सितंबर को जब स्टॉक मार्केट खुलेगा तो इसके शेयरों पर नजर रहेगी। अभी इसके शेयरों के स्थिति की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 18 सितंबर को बीएसई पर यह 2.23% की बढ़त के साथ ₹2887.20 पर बंद हुआ था।

कैसा ऑर्डर मिला है Knowledge Marine को?

नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग को मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से ₹279.33 करोड़ का तीसरा ग्रीन टग कॉन्ट्रैक्ट (Green Tug Contract) मिला है। ग्रीन टग का मतलब ऐसी इलेक्ट्रिक जहाज है जो छोटी लेकिन पावरफुल होती है और यह बंदरगाहों पर बड़े जहाजों को खींचने और धक्का देने इत्यादि का काम करती है। कंपनी ने शनिवार को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि इस कॉन्ट्रैक्ट में 60 टन बोलार्ड पुल यानी 60 टन बल खींचने की क्षमता वाले इलेक्ट्रिक टग के चार्टरिंग यानी किराए पर देने और साथ ही उसकी मैनिंग, ऑपरेशन, मेंटेनेंस और पूरा टेक्निकल मैनेजमेंट शामिल है।

ग्रीन टग के तीनों कॉन्ट्रैक्ट्स पर नॉलेज मरीन की सब्सिडियरी नॉलेज शिपयार्ड काम करेगी जो इसके दूसरे ग्रीन प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि एक ही शिपबिल्डिंग प्लेटफॉर्म पर कई ग्रीन टग्स को एक साथ बनाने से कंपनी को बेहतर स्टैंडर्डाइजेशन, रिपीटेबिलिटी यानी दोहराने की क्षमता और एग्जीक्यूशन एफिसिएंसीज यानी काम करने की कुशलता विकसित करने का मौका मिलता है, साथ ही अगली पीढ़ी के मरीन एसेट्स बनाने में खास तकनीकी क्षमताएं भी डेवलप होती हैं।

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