HDFC Bank Share Price : मंगलवार को सुबह के कारोबार में HDFC बैंक के शेयरों में गिरावट आई है। इस प्राइवेट बैंक ने बताया है कि महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के साथ अपने समझौते की आंतरिक समीक्षा के बाद,बैंक के बोर्ड ने मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शशिधर जगदीशन,CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन और ग्रुप हेड(रिटेल एसेट्स)अरविंद वोहरा पर जुर्माना लगाया है। फिलहाल, NSE पर यह स्टॉक 0.89 फीसदी गिरकर 732.95 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है।
HDFC बैंक ने 27 जुलाई को बताया कि बोर्ड की सिफारिश पर जगदीशन्,वैद्यनाथन और वोहरा पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह फैसला 2017 और 2021 में डिपॉज़िट जुटाने के लिए MSRDC के साथ किए गए समझौते कि आंतरिक समीक्षा के बाद लिया गया है।
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में HDFC बैंक ने कहा है कि इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की स्पेशल डिसिप्लिनरी कमिटी की बैठक के दौरान बोर्ड को ऐसी कोई ठोस बात नहीं मिली जिससे यह साबित हो सके कि कोई गलत इरादे वाली कार्रवाई,निजी फायदा उठाने की कोशिश या अनुचित मकसद था। हालांकि,बैंक ने कहा कि इसमें शामिल कर्मचारियों का व्यवहार बिज़नेस के दायरे से बाहर जाकर काम करने (बिज़नेस ओवररीच) जैसा था।
बैंक ने आगे कहा है कि RBI के लागू निर्देशों के किसी भी उल्लंघन को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने तीन सीनियर कर्मचारियों (मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO,चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और ग्रुप हेड -रिटेल एसेट्स) को चेतावनी पत्र जारी करने और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला किया है। बाकी कर्मचारियों को चेतावनी पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है।
बैंक के बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया है कि इस मामले की जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया को दी जाए।
बताते चलें कि इससे पहले मई में मीडिया रिपोर्टों में यह आरोप लगाया गया था कि HDFC बैंक ने बड़े डिपॉज़िट हासिल करने के लिए MSRDC को 45 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इन भुगतानों को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया गया था और जगदीशन को इन भुगतानों के बारे में जानकारी थी।
वहीं, HDFC बैंक ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा था कि उसके पास मजबूत इंटरनल निगरानी,ऑडिट और कंट्रोल प्रोसेस हैं और सभी मामलों को तय नियमों के अनुसार निपटाया गया था।
गौरतलब है कि इससे पहले भी HDFC बैंक में एक स्वतंत्र कानूनी जांच भी हुई थी। उसमें भी पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती की ओर से कॉरपोरेट गवर्नेंस और नैतिकता को लेकर उठाए गए सवालों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला था।