Stock Market Strategy amid Crude Oil Boil: घरेलू स्टॉक मार्केट में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। कच्चा तेल प्रति बैरल $120 के करीब पहुंचा तो हाहाकार मच गया और इस कारण चौतरफा धड़ाधड़ बिकवाली होने लगी। इन सबके बीच शेयर मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह का कहना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें काफी नीचे नहीं आ जाती और पश्चिमी एशिया में तनाव कम नहीं होता, शेयर बाजारों के लिए रैली को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें वापस प्रति बैरल $75 बैरल तक नहीं आतीं और पश्चिम एशिया में माहौल शांत नहीं होती और किसी तरह का समझौता नहीं होता, तब तक बाजार के यहां से ऊपर जाने की संभावना बहुत कम है। सुनील शाह के मुताबिक बीच-बीच में तकनीकी उछाल दिख सकती है लेकिन बाजार में मौजूदा माहौल फिलहाल सुस्ती का ही है।
तेल आयात पर अधिक निर्भरता बना रहा दबाव
सुनील शाह का कहना है कि सबसे अधिक चिंता इसी बात की है कि देश के ऊर्जा की 70-75% जरूरतें आयात से पूरी होती है और ऊंचे भाव का संबंध देश की जीडीपी ग्रोथ से है। अगर जीडीपी ग्रोथ अनुमान के मुताबिक नहीं रही तो इसका असर कॉरपोरेट इंडिया, उसकी कमाई और रेवेन्यू पर पड़ता है। उनका कहना है कि अगर महंगी एनर्जी से कंपनियों की कमाई घटती है, तो निश्चित रूप से बाजार भी नीचे आएगा।
शाह के अनुसार बाजार में मौजूदा दबाव घरेलू आर्थिक हालात की वजह से नहीं बल्कि भू-राजनीतिक घटनाओं के चलते है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलती भू-राजनीतिक स्थिति ने वैश्विक पूंजी प्रवाह में अनिश्चितता बढ़ा दी है, स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है और किसी को नहीं पता कि निवेश किस किस दिशा में जाएगा और निवेशक किस सुरक्षित ठिकाने की तलाश करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ भी अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है।
इस कारण तेल में उछाल और फिर आई नरमी
कच्चे तेल में भारी उठा-पटक है और लंबे समय बाद यह प्रति बैरल $120 के करीब पहुंच गया। हालांकि कच्चे तेल में एक रिपोर्ट के चलते हल्की नरमी भी आई। ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई के चलते दुनिया भर में कोहराम मचा हुआ है और खाड़ी देशों के कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के फैसले ने इसमें उबाल ला दिया और यह उछलकर प्रति बैरल $120 के करीब पहुंच गया। हालांकि फिर जब एक रिपोर्ट में सामने आया कि G7 देश अपने आपातकालीन भंडार से कच्चा तेल जारी करने पर विचार कर रहे हैं तो यह नरम पड़ गया। आज 9 मार्च को दो घंटे के भीतर ही अमेरिकी तेल की कीमतें प्रति बैरल करीब $15 गिर गईं और $104 से नीचे आ गई। रिपोर्ट के मुताबिक G7 देश लगभग 40 करोड़ बैरल तेल अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जारी कर सकते हैं।
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