शुक्रवार, 26 दिसंबर को भारतीय शेयर बाजार गिरावट में बंद हुए थे। सेंसेक्स 367.25 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 85,041.45 पर और निफ्टी 99.80 अंक या 0.38 प्रतिशत गिरकर 26,042.30 पर बंद हुआ। घरेलू और वैश्विक स्तर पर किसी मजबूत संकेत के अभाव और विदेशी निवेशकों की निकासी जारी रहने से गिरावट दर्ज की गई। नए सप्ताह में साल 2026 की शुरुआत होगी। दिसंबर के वायदा-विकल्प सौदे पूरे होने के कारण अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। 29 दिसंबर से शुरू सप्ताह में बाजार की चाल किन फैक्टर्स के बेसिस पर तय होगी, आइए जानते हैं...
1 जनवरी को देश की ऑटोमोबाइल कंपनियों की दिसंबर महीने में बिक्री का डेटा सामने आएगा। इन पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स की खास नजर रहेगी। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अशोक लेलैंड, हीरो मोटोकॉर्प, टीवीएस जैसे शेयर फोकस में रहेंगे।
IP डेटा, मैन्युफैक्चरिंग PMI
नए शुरू हो रहे सप्ताह में नवंबर का औद्योगिक उत्पादन का डेटा जारी होगा। इससे पता चलेगा कि देश में इंडस्ट्रीज की गतिविधियां कैसी जा रही हैं। साथ ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ मापने वाला एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग PMI का डेटा भी रिलीज होगा।
विदेशी निवेशकों की गतिविधि
साल 2025 में विदेशी निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड तोड़ पैसे निकाले। करेंसी की अस्थिर चाल, ग्लोबल ट्रेड को लेकर टेंशन, खासकर संभावित अमेरिकी टैरिफ, और बढ़े हुए वैल्यूएशन ने निवेशकों की रिस्क लेने की भूख कम कर दी। इसके चलते इस साल 26 दिसंबर तक भारतीय शेयरों में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.58 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग की। बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि 2026 में यह ट्रेंड पलट जाएगा। 26 दिसंबर तक FPI ने डेट मार्केट में 59,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 317.56 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रिलायंस ब्रोकिंग लिमिटेड में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बाजार अमेरिका से जुड़े व्यापक आर्थिक संकेतों पर करीबी नजर रखेंगे। इनमें फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग के मिनट्स और फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा US और चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI आंकड़े भी फोकस में रहेंगे।
26 दिसंबर को रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे टूटकर 89.90 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में सुधार, आयातकों की ओर से डॉलर की मजबूत डिमांड और व्यापार समझौते से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने निवेशकों की कारोबारी धारणा को प्रभावित किया।