8 मई को खत्म हुए पिछले कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स ने 414.69 अंक या 0.53 प्रतिशत की तेजी देखी। निफ्टी 178.6 अंक या 0.74 प्रतिशत चढ़ा। शुक्रवार, 8 मई को सेंसेक्स 516.33 अंकों की गिरावट के साथ 77,328.19 पर और निफ्टी 150.50 अंकों की गिरावट के साथ 24,176.15 पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ी। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ने से बाजार में जोखिम से बचने का रुझान देखा गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख ने भी गिरावट को बढ़ाया। अब 11 मई से शुरू हो रहे सप्ताह में बाजार की चाल किन अहम फैक्टर्स के आधार पर तय होगी, आइए जानते हैं...
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि बाजार इस सप्ताह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील रहेगा और निवेशकों का ध्यान अमेरिका-ईरान से संबंधित घटनाक्रमों पर रहेगा। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील बने रहेंगे। बाजार व्यापक दायरे में कारोबार कर सकता है।
नए शुरू हो रहे सप्ताह में देश की खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े भी आने वाले हैं। ये भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। भारत के अप्रैल महीने के खुदरा महंगाई के आंकड़े ब्याज दर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीति कैसी रह सकती है, इसका संकेत देंगे। इसके अलावा अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी नए सप्ताह में जारी होंगे। इनसे फेडरल रिजर्व की नीति का संकेत मिलेगा।
नए शुरू हो रहे सप्ताह में केनरा बैंक, टाटा पावर, भारती एयरटेल, DLF, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और जेएसडब्ल्यू स्टील समेत कई कंपनियां अपने तिमाही नतीजों की घोषणा करेंगी। इसके अलावा निवेशक शुक्रवार को जारी हुए वित्तीय नतीजों पर प्रतिक्रिया देंगे।
ब्रेंट कच्चे तेल का दाम बाजार की दिशा तय करने वाला एक अहम कारक रहेगा। पोनमुडी आर के मुताबिक, ‘‘यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं या तनाव कम करने की दिशा में प्रगति होती है तो जोखिम वाले निवेश माध्यमों में राहत भरी तेजी देखी जा सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में बाजार पर दबाव बना रह सकता है।’’ ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स इस वक्त 101.29 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) U.S. क्रूड फ्यूचर्स 95.42 डॉलर प्रति बैरल पर है। कच्चे तेल के महंगे होने से महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो जाता है।
रुपये की चाल पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। शुक्रवार, 8 मई को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 25 पैसे की गिरावट के साथ 94.47 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ।
विदेशी निवेशकों की गतिविधि
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजारों में सेलिंग जारी रखी है। मई महीने में अब तक FPI भारतीय शेयर बाजारों से 14,231 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, इसके साथ ही 2026 में FPI की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का आंकड़ा बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि FPI की बिकवाली की मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक अनिश्चितता है। विदेशी निवेशक खास तौर पर महंगाई, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर चिंतित हैं।
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