Market This Week: इस हफ्ते किस ओर करवट लेगा बाजार; विधानसभा चुनावों के नतीजों, तेल की कीमत, Q4 नतीजों समेत इन अहम फैक्टर्स से होगा तय
Market This Week: इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा मुख्य रूप से 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों पर निर्भर कर सकती है। नए सप्ताह में अंबुजा सीमेंट्स, हीरो मोटोकॉर्प, महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कई प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होंगे
शुक्रवार, 1 मई को शेयर बाजार महाराष्ट्र दिवस के मौके पर बंद था।
30 अप्रैल को खत्म हुए पिछले कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स ने 249.29 अंक या 0.32 प्रतिशत की तेजी देखी। निफ्टी 99.6 अंक या 0.41 प्रतिशत चढ़ा। शुक्रवार, 1 मई को शेयर बाजार महाराष्ट्र दिवस के मौके पर बंद था। उससे पहले गुरुवार को सेंसेक्स 582.86 अंक या 0.75 प्रतिशत टूटकर 76,913.50 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 180.10 अंक या 0.74 प्रतिशत गिरकर 23,997.55 पर बंद हुआ।
कच्चे तेल के ऊंचे स्तर, वैश्विक बाजारों की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू शेयर बाजार फिसले। अब 4 मई से शुरू हो रहे सप्ताह में बाजार की चाल किन फैक्टर्स के आधार पर तय होगी, आइए जानते हैं...
5 राज्यों के विधानसभा चुनाव
इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा मुख्य रूप से 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों पर निर्भर कर सकती है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। अब वोटों की गिनती 4 मई को होगी। निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि क्या केंद्र में सत्तारूढ़ दल पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को हरा सकेगा। साथ ही इस पर भी कि क्या बीजेपी, विपक्ष के शासन वाले केरल और तमिलनाडु में अच्छी पैठ बना सकेगी।
पश्चिम एशिया संघर्ष
निवेशक पश्चिम एशिया संघर्ष और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नजर रखेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनेगी, या फिर यह संघर्ष और गहराएगा, इस बात पर भारतीय बाजारों के साथ-साथ दुनिया भर के बाजारों की नजर टिकी है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है। पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव में ईरान ने ट्रंप प्रशासन के 9-सूत्रीय ढांचे का जवाब दिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर शांति चाहता है, वरना वह युद्ध के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
कच्चे तेल की कीमत
अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष आगे बढ़ा, इसने और गंभीर रूप लिया तो कच्चे तेल की कीमत में और इजाफा हो सकता है। ईरान की ओर से सीजफायर को लेकर अमेरिका के समक्ष रखे गए प्रस्ताव की वजह से जुलाई में डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 108.17 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फ्यूचर्स भी 2.98 प्रतिशत की गिरावट के साथ 101.94 डॉलर प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतों में किसी भी नई तेजी से भारतीय शेयरों पर फिर से बिकवाली का दबाव आ सकता है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, लिवलॉन्ग वेल्थ के फाउंडर और रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद के का कहना है कि कच्चा तेल सबसे महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक कारक बना हुआ है। उनके मुताबिक, ''होर्मुज स्ट्रेट के आसपास चल रहे तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बरकरार है। भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें रुपये पर दबाव डालती हैं। इसका कॉरपोरेट मार्जिन के साथ ही राजकोषीय गतिशीलता पर भी असर पड़ता है।''
नए सप्ताह में अंबुजा सीमेंट्स, BHEL, हीरो मोटोकॉर्प, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज ऑटो, टाइटन, टाटा कंज्यूमर, स्विगी, MRF समेत 302 कंपनियों के तिमाही नतीजे घोषित किए जाएंगे।
मैक्रोइकोनॉमिक डेटा
नए सप्ताह में जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो 4 मई को एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई सामने आएगा। उसके बाद 6 मई को सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई और 8 मई को विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े जारी होंगे। ये आंकड़े आर्थिक गति और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता के बारे में संकेत देंगे।
विदेशी निवेशकों का रुख
विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में लगातार सेलर बने हुए हैं। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, गुरुवार, 30 अप्रैल को उन्होंने 8,048 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3,487 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
वैश्विक बाजारों की चाल
शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में नैस्डेक और S&P 500 हरे निशान में बंद हुए। वहीं डाउ जोन्स लाल निशान में रहा। यूरोपीय बाजारों में तेजी रही। भारत के अलावा दूसरे एशियाई बाजारों में से निक्केई 225 और शंघाई कंपोजिट बढ़त में बंद हुए। हेंग सेंग गिरावट में बंद हुआ। कॉस्पी फ्लैट रहा।
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