Stock Markets Budget 2026: स्टॉक मार्केट्स को मिलेगा बूस्टर डोज, तेज रफ्तार पकड़ेगा शेयर बाजार

साल 2025 शेयरों के निवेशकों के लिए अच्छा नहीं रहा। दुनिया के बड़े बाजारों के मुकाबले इंडियन मार्केट्स का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इंडियन मार्केट से पैसे निकाल दूसरे उभरते बाजारों में निवेश किया। इससे बाजार पर दबाव बना रहा

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 8:29 AM
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सरकार एसटीटी में कमी कर सकती है या धीरे-धीरे इसे हटा सकती है।

यूनियन बजट 2026 से स्टॉक मार्केट्स को बूस्टर डोज मिल सकता है। इससे फिर से इंडियन मार्केट्स में रौनक लौट सकती है। साल 2026 की शुरुआत शेयर बाजार के लिए अच्छी थी। लेकिन, जल्द ट्रेंड बदल गया। बाजार पर बिकवाली का दबाव ब़ढ़़ गया। 2025 में भी इंडियन मार्केट्स का प्रदर्शन दुनिया के दूसरे बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण स्टॉक मार्केट्स के लिए बड़े ऐलान कर सकती हैं।

FIIs ने इंडियन मार्केट में क्यों की बिकवाली?

साल 2025 शेयरों के निवेशकों के लिए अच्छा नहीं रहा। दुनिया के बड़े बाजारों के मुकाबले इंडियन मार्केट्स का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इंडियन मार्केट से पैसे निकाल दूसरे उभरते बाजारों में निवेश किया। इससे बाजार पर दबाव बना रहा। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी कर बाजार को काफी हद तक संभाला। अगर घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी नहीं की होती तो इंडियन मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई होती।


शेयरों की वैल्यूएशंस क्यों ज्यादा बनी रही?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडियन मार्केट्स के 2025 में कमजोर प्रदर्शन की एक बड़ी वजह ज्यादा वैल्यूएशन है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट के बावजूद वैल्यूएशन बहुत कम नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना था कि कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ बढ़ने पर वैल्यूएशन सही लेवल पर आ जाएगी। लेकिन, सितंबर तिमाही में कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ कमजोर रही। दिसंबर तिमाही में भी अर्निंग्स ग्रोथ उम्मीद के मुकाबले कमजोर रही है।

कितना रहा इंडियन मार्केट्स का रिटर्न?

2025 में सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न करीब 10 फीसदी रहा। दुनिया के दूसरे बाजारों के रिटर्न से तुलना करने पर यह बहुत कम दिखता है। अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स के प्रमुख सूचकांक नैस्डेक कंपोजिट का रिटर्न 2025 में 26 फीसदी रहा। चीन के मार्केट का रिटर्न 26 फीसदी रहा। एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स का रिटर्न पिछले साल करीब 30 फीसदी रहा। जापान के बाजार के प्रमुख सूचकांक निक्केई में 28 फीसदी तेजी देखने को मिली। ताइवान का बाजार 27 फीसदी चढ़ा। दक्षिण कोरिया के कोस्पी ने 76 फीसदी रिटर्न दिया।

क्या ऐलान कर सकती हैं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण?

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट में बाजार को मजबूती देने के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती हैं। मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स के विकल्प के रूप में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) की शुरुआत की थी। 2018 में दोबारा एलटीसीजी टैक्स लागू करने के बाद एसटीटी की जरूरत नहीं रह गई है। सरकार एसटीटी में कमी कर सकती है या धीरे-धीरे इसे हटा सकती है।

क्या एसटीटी में कमी का ऐलान यूनियन बजट में हो सकता है?

इनवेस्टर्स का कहना है कि लिस्टेंड कंपनियों के शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स को एक साल के अंदर पर बेचने पर हुआ मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस के तहत आता है। इस पर 20 फीसदी टैक्स लगता है। कई इनवेस्टर्स एक साल से पहले शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से अपना निवेश निकाल लेते हैं। 20 फीसदी टैक्स की वजह से उनका रिटर्न काफी कम हो जाता है। अगर इस टैक्स को कम किया जाता है तो निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को कंपनियों की डीलिस्टिंग के नियमों को भी आसान बनाने की जरूरत है। सरकार रिटेल निवेशकों को शेयरों में लॉन्ग टर्म निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए भी बड़े ऐलान कर सकती है।

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