मार्केट निगेटिव सेंटीमेंट के बाद देता है दमदार रिटर्न, तो क्या जल्द मिलेगा जश्न मनाने का मौका?

फर्स्ट ग्लोबल की फाउंडर देविना मेहरा ने कहा कि डेटा यह संकेत देते हैं कि जब सेंटिमेंट निगेटिव होता है तो उसके बाद मार्केट का रिटर्न औसत से ज्यादा होता है। जब सेंटिमेंट बहुत पॉजिटिव होता है तो आगे मार्केट का रिटर्न कमजोर होता है

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 5:13 PM
देविना मेहरा ने कहा कि लड़ाई के दौरान भी शायद ही कभी ऑयल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रही है।

अगर बाजार में निगेटिव माहौल से आप मायूस हैं तो आपको फर्स्ट ग्लोबल की फाउंडर देविना मेहरा की बात ध्यान से सुनने की जरूरत है। उन्होंने कहा है कि इनवेस्टर्स को अभी मूड को समझने की जरूरत है, न कि इस पर प्रतिक्रिया देने की। एक कार्यक्रम में उन्होंने शेयर मार्केट और इनवेस्टमेंट को लेकर कई खास बातें बताईं।

निगेटिव सेंटिमेंट के बाद बाजार का रिटर्न बेहतर होता है

उन्होंने कहा कि अभी रिस्क से दूर रहने का माहौल है। यही वह सेट-अप है, जिसने ऐतिहासिक रूप से आगे बेहतर रिटर्न दिए हैं। उन्होंने कहा, "सभी डेटा यह संकेत देते हैं कि जब सेंटिमेंट निगेटिव होता है तो उसके बाद मार्केट का रिटर्न औसत से ज्यादा होता है। जब सेंटिमेंट बहुत पॉजिटिव होता है तो आगे मार्केट का रिटर्न कमजोर होता है। सेंटिमेंट और रिटर्न में उल्टा रिश्ता है।"


शेयर मार्केट का सेंटिमेंट सबसे भरोसेमंद संकेत

मेहरा ने मार्केट के सेंटिमेंट को भरोसेमंद संकेत बताया। उन्होंने कहा, "यह मेरी राय नहीं है। दुनियाभर में हर स्टडी में यह बात सामने आई है। जब आप मार्केट से निवेश निकालने, अपने सिप को बंद करने के बारे में सोचने लगते हैं तो अगले साल मार्केट आपको औसत से ज्यादा रिटर्न देता है।" उन्होंने ये बातें तब कही हैं जब दुनियाभर के मार्केट्स में सेंटिमेंट कमजोर है।

क्रूड ऑयल की कीमतें कुछ समय तक हाई रहेंगी

मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है। इसका खराब असर मार्केट पर पड़ा है। विदेशी फंड्स भारत सहित उभरते बाजारों में बिकवाली कर रहे हैं। मेहरा ने क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों के बारे में कहा कि यह कुछ समय के लिए है। उन्होंने कहा कि क्रूड में उछाल की बड़ी वजह सेंटिमेंट है। उन्होंने कहा कि लड़ाई के दौरान भी शायद ही कभी ऑयल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रही है।

इन सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा रहने की संभावना

उन्होंने ऑटो कंपोनेंट्स कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि निवेशकों को ऑटो के साथ ही फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना चाहिए। इन सेक्टर्स के लिए ऑयल की ऊंची कीमतों से किसी तरह की बड़ी चुनौती नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में रुपये में जिस तरह से कमजोरी आई है, उसके देखते हुए ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन जरूरी लगता है। किसी एक देश या करेंसी पर ज्यादा निर्भरता रिस्क बढ़ाती है।

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डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेशी शेयरों में निवेश की सलाह

मेहरा ने कहा कि विदेशी शेयरों में निवेश करना एक विकल्प नहीं है। आपका कम से कम 30-40 फीसदी ऐलोकेशन विदेशी शेयरों में होना चाहिए। पोर्टफोलियो में सिर्फ मुट्ठीभर बड़ी अमेरिकी और चाइनीज कंपनियों के शेयर नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेशकों को मौजूदा हालात में निवेश के लिए सही समय तलाशने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसकी जगह उन्हें बेसिक एसेट्स ऐलोकेसन का ध्यान रखना चाहिए।

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