Stock Markets: इस साल 15% गिरावट के बाद शेयरों की कीमतें क्या अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई हैं?

Bernstein ने 94 लार्जकैप स्टॉक्स और मिडकैप स्टॉक्स की स्टडी की है। इस लिस्ट में फाइनेंशियल कंपनियों के शेयरों को शामिल नहीं किया। बाजार की सही नब्ज जानने के लिए उसने लिस्ट में कुछ मिडकैप स्टॉक्स शामिल किए। ब्रोकरेज फर्म ने पिछले साल भी बाजार में तेज गिरावट आने पर ऐसा किया था

अपडेटेड Apr 01, 2026 पर 6:44 PM
Story continues below Advertisement
पिछले साल की दूसरी तिमाही से अर्निंग्स मिड से लो सिंगल डिजिट में बनी रही है।

शेयर बाजार में इस साल अब तक करीब 15 फीसदी गिरावट आई है। कई इनवेस्टर्स का मानना है कि इस गिरावट की वजह कई अच्छी कंपनियों के शेयर की कीमतें अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई हैं। लेकिन, ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की रिपोर्ट की मानें तो ऐसा नहीं है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयरों की कीमतें ऐसे लेवल पर नहीं आई हैं कि उन्हें तुरंत खरीद लिया जाए।

बर्नस्टीन ने 94 शेयरों की स्टडी की

Bernstein ने 94 लार्जकैप स्टॉक्स और मिडकैप स्टॉक्स की स्टडी की है। इस लिस्ट में फाइनेंशियल कंपनियों के शेयरों को शामिल नहीं किया। बाजार की सही नब्ज जानने के लिए उसने लिस्ट में कुछ मिडकैप स्टॉक्स शामिल किए। ब्रोकरेज फर्म ने पिछले साल भी बाजार में तेज गिरावट आने पर ऐसा किया था। इसका मकसद यह जानना था कि क्या तेज गिरावट के बाद शेयरों की कीमतें अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई हैं।


अनुमानित एबिड्टा ग्रोथ रेट में गिरावट 

शेयरों की कीमतें बहुत अट्रैक्टिव नहीं दिखने की एक वजह एक बेहतर बेस ईयर (FY25) के बाद एक खराब ईयर (FY26) है। FY25 में कई कंपनियों के वित्तीय नतीजे अच्छे रहे। इससे इनवेस्टर्स को अच्छा स्टार्टिंग प्वाइंट मिला। लेकिन बाद का साल यानी FY26 उम्मीद के मुकाबले काफी कमजोर रहा। 94 कंपनियों की EBITDA का अनुमानित ग्रोथ रेट FY25 और FY27 के बीच करीब 35 फीसदी से घटकर आज 19 फीसदी रह गया।

अर्निंग्स मिड से लो सिंगल डिजिट में बनी रही

पिछले साल की दूसरी तिमाही से अर्निंग्स मिड से लो सिंगल डिजिट में बनी रही है। डाउनग्रेड भी देखने को मिले हैं। ब्रोकरेज फर्म ने जब हर कंपनी की शॉर्ट टर्म EBITDA ग्रोथ की तुलना लंबी अवधि के अनुमान से की तो चार्ट पर कुछ खास नतीजे देखने को मिले। एस साल पहले ज्यादातर शेयरों मिडिल बैंड में थे, जहां शॉर्ट टर्म वास्तविकता और लंबी अवधि की उम्मीद के बीच संबंध दिखा। अब मिडिल बैंड खाली है।

कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी शेयरों पर ज्यादा असर

अर्निंग्स के लिहाज से कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी (कार, रिटेल, रेस्टॉरेंट्स, फैशन) शेयरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। इन शेयरों की कीमतों में सबसे ज्यादा गिरावट दिखी। इनके प्रॉफिट के अनुमान में तो और भी ज्यादा गिरावट आई। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इन शेयरों की कीमतों में गिरावट और अर्निंग्स डाउनग्रेड में सबसे ज्यादा फर्क देखने को मिला। दूसरी तरफ, सीमेंट और एनर्जी शेयर डाउनग्रेड से काफी हद तक बचे रहे। बाकी हर सेक्टर में FY25-27 के दौरान EBITDA ग्रोथ रेट में बड़ी गिरावट दिखी।

यह भी पढ़ें: Dollar के मुकाबले क्या रुपया गिरकर 100 पर आ जाएगा? जानिए क्या हैं एनालिस्ट्स के जवाब

सेक्टर के कुछ खास शेयरों पर फोकस जरूरी 

बर्नस्टीन का कहना है कि आम तौर पर यह माना जा रहा है कि 15 फीसदी गिरावट के बाद शेयरों की कीमतें अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है। ऐसे में निवेश करने के लिए सेक्टर में खास शेयरों की पहचान करने पर फोकस करना होगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया गिरावट का असर कीमतों पर पड़ा है। लेकिन, शॉर्ट टर्म में अर्निंग्स की उम्मीदों पर भी असर पड़ा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।