पेट्रोल और डीजल महंगे हुए तो क्या बाजार में बढ़ेगा कोहराम? जानिए क्या हैं एक्सपर्ट्स के जवाब

विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल कीमतें बढ़ने की चर्चा कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है। इस रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विधानसभा चुनावों के खत्म होने पर सरकार पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को बढ़ा सकती है

अपडेटेड Apr 24, 2026 पर 2:01 PM
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क्रूड में उछाल के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।

विधानसभा चुनावों के बाद अगर सरकार पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें बढ़ाती है तो उसका मार्केट पर क्या असर पड़ेगा? एनालिस्ट्स का मानना है कि इसका भारतीय शेयर बाजारों पर तुरंत असर पड़ेगा। इससे बाजार में बड़ी बिकवाली दिख सकती है। हालांकि, सरकार ने 23 अप्रैल को इससे इनकार किया कि चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजलें की कीमतें बढ़ने जा रही हैं।

कोटक की रिपोर्ट के बाद ईंथन की कीमतें बढ़ने की चर्चा

विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल कीमतें बढ़ने की चर्चा कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है। इस रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विधानसभा चुनावों के खत्म होने पर सरकार पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को बढ़ा सकती है। अब सिर्फ पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का चुनाव बचा है। 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव होने वाले हैं। इसके बाद 4 मई को पांचों विधानसभा के चुनावों के नतीजे आएंगे।


25-28 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकती हैं कीमतें

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें 25-28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं। इस रिपोर्ट में क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, 24 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की चर्चा से लोग चिंति हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईंधन की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

सरकारी ऑयल कंपनियों को हर महीने 27,000 करोड़ लॉस

कोटक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार ऑयल कंपनियों को लागत से कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेचने से हर महीने 27,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। एक समय तो क्रूड का भाव 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, उसके बाद उसमें कुछ नरमी आई। क्रूड में उछाल के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। इससे उन्हें बड़ा नुकसान हो रहा है।

इन सेक्टर में दिख सकती है बड़ी बिकवाली

मास्टर कैपिटल सर्विसेज में एवीपी (रिसर्च) विष्णु कांत उपाध्याय ने कहा, "राज्यों में चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का बड़ा असर शेयर बाजार पर दिखेगा। खासकर एफएमसीजी, ऑटो और लॉजिस्टिक्स जैसी कंजम्प्शन आधारित सेक्टर के शेयरों में बड़ी बिकवाली दिख सकती है। इन कंपनियों के मार्जिन पर इनपुट कॉस्ट बढ़ने का असर पड़ेगा। "

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बाजार पर बढ़ सकता है सेलिंग प्रेशर

उन्होंने कहा कि इनफ्लेशन बढ़ने और मॉनेटरी पॉलिसी पर उसके संभावित असर की वजह बाजार के प्रमुख सूचकांकों में शॉर्ट टर्म में प्रेशर दिख सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि बाजार पर पड़ने वाला असर इस बात पर निर्भर करेगा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कितनी बढ़ती हैं। अगर कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ती है तो उसका सीमित असर पड़ेगा। लेकिन, कीमतें ज्यादा बढ़ने पर बाजार में लगातार बिकवाली दिख सकती है।

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