Stock Markets के इनवेस्टर्स सावधान! निफ्टी और 14 फीसदी क्रैश कर सकता है

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म ने Nifty 50 का टारगेट भी घटा दिया है। उसने इसकी वजह खराब होते आर्थिक हालात और अर्निंग्स साइकिल पर मंडरा रहे खतरे को बताया है। Goldman Sachs ने निफ्टी के टारगेट को घटाकर करीब 25,300-25,900 कर दिया है। पहले उसने निफ्टी के लिए 29,300-29,500 का टारगेट दिया था

अपडेटेड Mar 27, 2026 पर 12:21 PM
Story continues below Advertisement
लगातार दो दिन की तेजी के बाद 27 मार्च को बाजार में तेज गिरावट आई।

शेयर बाजार के निवेशकों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रहा। लगातार दो दिन की तेजी के बाद 27 मार्च को बाजार में तेज गिरावट आई। हफ्ते का अंतिम दिन बाजार के लिए ब्लैक फ्राइडे साबित हो सकता है। हालांकि, अभी बाजार बंद होने में कई घंटे बाकी हैं। इस बीच, गोल्डमैन सैक्स ने भारतीय शेयर बाजार को डाउनग्रेड कर दिया है। उसने भारतीय बाजार को 'ओवरवेट' से डाउग्रेड कर 'मार्केटवेट' कर दिया है।

ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी का टारगेट घटाया

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म ने Nifty 50 का टारगेट भी घटा दिया है। उसने इसकी वजह खराब होते आर्थिक हालात और अर्निंग्स साइकिल पर मंडरा रहे खतरे को बताया है। Goldman Sachs ने निफ्टी के टारगेट को घटाकर करीब 25,300-25,900 कर दिया है। पहले उसने निफ्टी के लिए 29,300-29,500 का टारगेट दिया था। इसका मतलब है कि ब्रोकरेज फर्म को निफ्टी में 14 फीसदी की गिरावट की आशंका दिख रही है।


रिस्क-रिवार्ड रेशियो दूसरे बाजारों से कमजोर

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार का रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो दूसरे एशियाई बाजारों के मुकाबले कम अट्रैक्टिव रह गया है। इसमें विदेश और देश से आने वाली निगेटिव खबरों का बड़ा हाथ है। ब्रोकरेज फर्म का यह भी कहना है कि अगले दो से तीन तिमाहियों में कॉर्पोरेट अर्निंग्स के अनुमान में कमी देखने को मिल सकती है। खासकर उन कंपनियों की अर्निंग्स में कमी आ सकती है, जिनका संबंध घरेलू कंजम्प्शन और इनवेस्टमेंट से है।

कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ के अनुमान में भी कमी

गोल्डमैन सैक्स ने पहले ही 2026 के लिए अर्निंग्स ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 8 फीसदी कर दिया है। 2027 के लिए उसने 13 फीसदी अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान जताया है। यह दोनों अनुमान ब्रोकरेज फर्म के पहले जताए गए अनुमान से काफी कम हैं। भारतीय बाजार को डाउनग्रेड करने की सबसे बड़ी वजह एनर्जी की कीमतों में आया उछाल है। मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है। इससे क्रूड की सप्लाई घटी है, जिससे तेल और गैस की कीमतों में उछाल है।

क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें भारत को पहुंचा सकती हैं नुकसान

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि अगर ऑयल की कीमतें लंबे समय तक हाई बनी रहती हैं तो इससे भारत की इकोनॉमी को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। भारत ऑयल की अपनी 85 फीसदी से ज्यादा जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमत में प्रति बैरल 45 डॉलर का उछाल अगर 3 महीनों से ज्यादा समय तक बना रहता है इंडिया की पूरे साल की अर्निंग्स ग्रोथ में करीब 9 फीसदी गिरावट आ सकती है।

यह भी पढ़ें: Stock Markets के लिए ब्लैक फ्राइडे, सेंसेक्स 1200 अंक फिसला, निफ्टी 23000 के नीचे; इन 7 कारणों से आई गिरावट

गोल्डमैन सैक्स ने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी घटाया

गोल्डमैन सैक्स ने मौजूदा स्थितियों को देखते हुए 2026 में भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटकर 5.9 फीसदी कर दिया है। उसका मानना है कि महंगे क्रूड की वजह से भारत में इनफ्लेशन करीब 0.70 फीसदी बढ़ सकता है। करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़कर जीडीपी के 2 फीसदी तक पहुंच सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में पहले से गिरावट जारी है। 2026 में आरबीआई इंटरेस्ट रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर सकता है। उधर, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। सितंबर 2024 के बाद से वे भारतीय बाजार में रिकॉर्ड 42 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।