Stock Markets: क्या सरकार STT बढ़ाने के फैसले को वापस लेगी? जानिए एनएसई ने इस बारे में क्या कहा

NSE के मैनेजमेंट ने कहा कि कैश मार्केट में एसटीटी थोड़ा घटने की उम्मीद यूनियन बजट में थी। लेकिन, यह पूरी नहीं हुई। इसके उलट फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस दोनों पर एसटीटी थोड़ा बढ़ गया। इंडेक्स फ्यूचर्स और खासकर स्टॉक्स फ्यूचर्स में एसटीटी बढ़ने को निगेटिव माना जा रहा है

अपडेटेड Feb 10, 2026 पर 2:46 PM
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को एफएंडओ पर एसटीटी बढ़ाने का ऐलान किया था।

एनएसई को उम्मीद है कि सरकार फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) पर एसटीटी बढ़ाने के फैसले पर पुनर्विचार करेगी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को एफएंडओ पर एसटीटी बढ़ाने का ऐलान किया था। एनएसई के मैनेजमेंट ने 9 फरवरी को बताया कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स को यूनियन बजट 2026 में एसटीटी खासकर कैश मार्केट में एसटीटी में कमी होने की उम्मीद थी। लेकिन, सरकार ने यूनियन बजट में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर एसीटीटी बढ़ाने का ऐलान किया।

STT बढ़ने से लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स को नुकसान

NSE के मैनेजमेंट ने कहा, " कैश मार्केट में एसटीटी थोड़ी घटने की उम्मीद यूनियन बजट में थी। लेकिन, यह पूरी नहीं हुई। इसके उलट हमने देखा कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस दोनों पर एसटीटी थोड़ा बढ़ गया।" मैनेजमेंट ने कहा कि इंडेक्स फ्यूचर्स और खासकर स्टॉक्स फ्यूचर्स में एसटीटी बढ़ने को निगेटिव माना जा रहा है, क्योंकि स्टॉक फ्यूचर्स आम तौर पर हेजिंग का इंस्ट्रूमेंट माना जाता है। लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स हेजिंग के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।


प्रतिनिधिमंडल सरकार से एसटीटी में कमी की कर रहे गुजारिश

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने बताया कि एसटीटी बढ़ाने के फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कई प्रतिनिधिमंडल सरकार से मिल रहे हैं। एक्सचेंज को उम्मीद है कि सरकार इस बारे में कुछ फैसला ले सकती है। उसने कहा कि ट्रांजेक्शन कॉस्ट बढ़ने से हेजिंग के असल मकसद के लिहाज से फ्यूचर्स का अट्रैक्शन घट सकता है। हालांकि, एक्सचेंज ने कहा कि डेरिवेटिव्स वॉल्यूम पर एसटीटी में वृद्धि के असर के बारे में बताना मुश्किल है। इससे पहले एसटीटी बढ़ने से ट्रेडिंग वॉल्यूम में ज्यादा गिरावट नहीं आई थी। मार्केट कॉस्ट में वृद्धि के साथ तालमेल बैठा चुका है।

इंडियन मार्केट्स में पहले से ट्रेडिंग कॉस्ट ज्यादा

ब्रोकरेज फर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था ANMI ने सरकार से एसटीटी बढ़ाने के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। उसने कहा है कि इसका काफी खराब असर फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर पड़ता है। ज्यादा ट्रांजेक्शन कॉस्ट्स का असर लिक्विडिटी, रिस्क मैनेजमेंट और पार्टिसिपेशन पर भी पड़ता है। खासकर तब जब इंडियन मार्केट्स में पहले से ही दूसरे मार्केट्स के मुकाबले ट्रेडिंग की कॉस्ट ज्यादा है।

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एसटीटी घटने से मार्केट में स्टैबिलिटी आएगी

ANMI का कहना है कि एसटीटी स्ट्रक्चर को बहाल करने से मार्केट में स्टैबिलिटी आएगी। बाजार में पार्टिसिपेंट्स का भरोसा बढ़ेगा। एनएसई का मानना है कि मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी) फ्रेमवर्क में रिफॉर्म्स की जरूरत है। एसएलबी के नियमों को आसान बनाने से मार्केट में लिक्विडिटी और गहराई बढ़ेगी। सरकार ने कहा है कि एफएंडओ पर एसटीटी बढ़ाने का मकसद रिटेल इनवेस्टर्स को एफएंडओ ट्रेडिंग के लिए हतोत्साहित करना है। सेबी की स्टडी में बताया गया है कि ज्यादातर रिटेल इनवेस्टर्स को एफएंडओ ट्रेडिंग में नुकसान होता है।

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