शेयर बाजार में 8 अप्रैल को जबर्दस्त रिकवरी आई। मध्यपूर्व में सीजफायर इसकी वजह थी। सेंसेक्स 2,946 प्वाइंट्स यानी 3.95 फीसदी चढ़कर 77,562 पर पहुंच गया। निफ्टी 873 अंक के उछाल के साथ 23,997 पर बंद हुआ। यह बीते 11 महीनों में सूचकांकों का सबसे हाई लेवल है। इससे पहले मई 2025 में सूचकांक इस लेवल पर थे। सवाल यह है कि क्या यह शेयर बाजार में रिकवरी की शुरुआत है?
ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट से बाजार को लगे पंख
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में सीजफायर की खबर से ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट आई। यह शेयर बाजार के लिए पॉजिटिव है। खासकर भारत जैसे क्रूड के आयातक देश को इस खबर से राहत मिली है। क्रूड में नरमी से महंगाई बढ़ने का खतरा घटेगा और रुपये पर दबाव कम होगा। 8 अप्रैल को भारत सहित दूसरे एशियाई बाजारों में भी तेजी देखने को मिली।
इनवेस्टर्स को अभी सावधानी बनाए रखने की सलाह
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में रिकवरी से इनवेस्टर्स खुश हैं। लेकिन, अभी सावधानी बनाए रखने की जरूरत है। शेयर डॉट मार्केट (फोनपे वेल्थ) में इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के हेड नीलेश डी नाइक ने कहा कि ऐसी तेजी शॉर्ट टर्म में काफी ज्यादा लगती है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से देखने पर यह काफी अप्रासंगिक लगती है। उन्होंने कहा, "इससे पहले मार्केट में आई बड़ी तेजी का लॉन्ग टर्ट में काफी कम असर दिखा है।"
निवेशकों को लंबी अवधि के लक्ष्य पर फोकस करने की सलाह
8 अप्रैल को बाजार में आई रिकवरी को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की जरूरत है। अभी इस रिकवरी के जारी रहने को लेकर किसी तरह का कनफर्मेशन नहीं हुआ है। यह सिर्फ रिलीफ रैली है। आनंद राठी वेल्थ के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर भरत राठौड़ ने कहा, "इनवेस्टर्स को शॉर्ट टर्म जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर प्रतिक्रिया जताने से बचना चाहिए। इसकी जगह उन्हें लंबी अवधि के लक्ष्य पर फोकस करना चाहिए।"
इनवेस्टर्स को रीबैलेंसिंग का ध्यान रखना चाहिए
नाइक ने कहा, "इनवेस्टर्स को प्रॉफिट बुक करने या शेयरों में निवेश बढ़ाने की जगह अपने एसेट ऐलोकेशन पर फोकस करना चाहिए। मार्केट में इस तरह के उछाल का फायदा उठाने की कोशिश के नतीजे अच्छे नहीं रहते हैं।" एक दूसरे एक्सपर्ट ने बताया कि आम तौर पर ऐसी तेजी को देख इनवेस्टर्स प्रॉफिट बुक करते हैं। निवेशक को अनुशासन बनाए रखना चाहिए। उन्हें सिर्फ रीबैलेंसिंग पर फोकस करना चाहिए।
इनवेस्टर्स को अपने सिप जारी रखने चाहिए
राठौड़ ने कहा कि जहां तक सिप इनवेस्टर्स का सवाल है तो उन्हें अपना सिप जारी रखना चाहिए। ऐसे निवेशकों को मार्केट में गिरावट आने पर ज्यादा यूनिट्स एलॉट होते हैं, जबकि मार्केट में तेजी आने पर कम यूनिट्स मिलते हैं। निवेशकों को अभी यह सोचने की जरूरत है कि उन्हें नया ऐलोकेशन किस तरह से करना है। जो लोग नया निवेश करना चाहते हैं उन्हें एकमुश्त निवेश करने की जगह धीरे-धीरे निवेश करने की जरूरत है।
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