Mining Stocks: आज माइनिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी पॉजिटिव खबर है। आज लोकसभा में सरकार माइन्स एंड मिनिरल्स डेवलपमेंट एंड रेग्युलेशन बिल (MMDRA Amendment Bill)पेश करेगी। इसमें माइनिंग पर टैक्स लगाने के राज्यों के अधिकार सीमित करने का प्रस्ताव है। इस खबर के चलते आज NMDC और वेदांता में खरीदारी आई है। NMDC के शेयर की बात करें तो यह शेयर 0.88 रुपए यानी 1.04 फीसदी की तेजी के साथ 85 रुपए के पार दिख रहा है।
NMDC और वेदांता में आई तेजी
आज के ट्रेडिंग सेशन में इंट्राडे में NMDC लिमिटेड का शेयर 2.18% बढ़कर 86.77 तक पहुंच गया। यह शेयर निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स का हिस्सा है। मनीकंट्रोल के एनालिसिस के अनुसार, 3 अगस्त, 2026 तक इस शेयर के लिए वेरी बेयरिश सेंटीमेंट होने के बावजूद शेयर में यह उछाल आया है।
वहीं, वेदांत के शेयर 6.45 रुपए यनी 2.31 फीसदी की बढ़त के साथ 285 रुपए पर दिख रहे हैं। आज का इसका दिन का हाई 285.80 रुपए है। मनीकंट्रोल के एनालिसिस के अनुसार यह तेजी 3 अगस्त, 2026 से स्टॉक में छाई मंदी के दौर के बाद देखने को मिली है। वेदांता,निफ्टी नेक्स्ट 50 इंडेक्स का हिस्सा है,जो ब्रॉडर मार्केट में इसकी अहमियत को दिखाता है।
इस खबर पर ज्यादा डिटेल जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण रॉय ने बताया कि माइनिंग सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। आज लोकसभा में MMDRA बिल 2026 पेश होगा। इसमें माइनिंग टैक्स पर राज्यों के अधिकार सीमित करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा पेंडिंग टैक्स डिमांड रद्द करने का भी प्रस्ताव है। यानी अब तक नहीं वसूले गए टैक्स की डिमांड रद्द करने का प्रस्ताव है। माइनिंग सेक्टर सेस के नियमों की भी समीक्षा किए जाने का प्रस्ताव है। SC के फैसले के आधार पर एक्ट में बदलाव किया जा रहा है।
माइनिंग टैक्स पर SC का आदेश?
SC के आदेश में कहा गया है कि माइनिंग टैक्स और रॉयल्टी पर राज्यों का अधिकार है। इस पर राज्यों का टैक्स लगाने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली अवधि से टैक्स वसूलने की इजाजत दी थी। SC ने राज्यों को 1 अप्रैल 2005 से कंपनियों पर बकाया माइनिंग टैक्स वसूलने की छूट दी थी।
MMDR 2026 की जरुरत क्यों पड़ी?
SC फैसले के बाद कंपनियों को राज्यों की तरफ से भारी-भरकम टैक्स का डर है। इससे माइनिंग, स्टील और पावर सेक्टर्स पर बहुत बड़ा वित्तीय बोझ आ सकता था। अनिश्चितता और टैक्स कंफ्यूजन को खत्म करने के लिए बिल की जरूरत थी। पुराने पेंडिंग बकाये और बिना-वसूले टैक्स की डिमांड को रद्द करना इसका मकसद है।