ज्यादातर सेगमेंट में ग्रोथ सुस्त रहने से टायर इंडस्ट्री की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

पहली तिमाही में मांग कमजोर रहने से भारतीय टायर इंडस्ट्री की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस दौरान मांग में गिरावट की वजह से टायरों की सेल्स ग्रोथ पर असर पड़ा है। पिछले साल टायर इंडस्ट्री की परफॉर्मेंस अच्छी रही थी, लेकिन इस साल पहली तिमाही में इस इंडस्ट्री में सुस्ती बनी रही। हालांकि, पैसेंजर कार टायरों के मोर्चे पर बेहतर नतीजे की उम्मीद है

अपडेटेड Jun 22, 2023 पर 2:54 PM
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पिछले साल भी पहली दो तिमाही के दौरान, घरेलू मार्केट में टायरों की सेल्स औसत रही थी।

पहली तिमाही में मांग कमजोर रहने से भारतीय टायर इंडस्ट्री की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस दौरान मांग में गिरावट की वजह से टायरों की सेल्स ग्रोथ पर असर पड़ा है। पिछले साल टायर इंडस्ट्री की परफॉर्मेंस अच्छी रही थी, लेकिन इस साल पहली तिमाही में इस इंडस्ट्री में सुस्ती बनी रही। हालांकि, इस मुश्किल दौर में पैसेंजर कार टायरों, खास तौर पर ओरिजिनल इक्विपमेंट (OE) सेल्स के मोर्चे पर बेहतर नतीजे की उम्मीद है। टायरों के एक्सपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है।

टायरों की मांग ऐसे वक्त में कम हुई है, जब इससे जुड़े कच्चे माल (सिंथेटिक रबड़ और केमिकल) की कीमतों में गिरावट हुई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय इन उत्पादों की कीमतें बढ़ गई थीं। ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ATMA) के डायरेक्टर राजीव बुद्धिराजा ने बताया कि पिछले साल पहली दो तिमाही के दौरान, घरेलू मार्केट में टायरों की सेल्स औसत रही, जबकि तीसरी तिमाही में इसमें थोड़ी तेजी देखने को मिली। वास्तविक ग्रोथ चौथी तिमाही में देखने को मिली।

वित्त वर्ष 2023 में, MRF, Apollo Tyres and JK tyres समेत सभी प्रमुख टायर कंपनियों के नतीजे बेहतर रहे। कार टायर की मांग में तेजी का सिलसिला मौजूदा वित्त वर्ष में भी जारी है। दरअसल, इस साल भी कई कारें लॉन्च होनी हैं। आम तौर पर, पहली तिमाही में कारों की बिक्री बढ़ती है और मॉनसून के देशभर में फैलने के साथ ही जुलाई तक इसमें सुस्ती आ जाती है। हालांकि, इस साल जून में बारिश कम होने के बावजूद गाड़ियों की बिक्री सुस्त रही है।

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टायर इंडस्ट्री को चीन से इंपोर्ट किए जाने वाले टायरों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी हटाए जाने के असर की भी चिंता सता रही है। यह ड्यूटी कुछ साल पहले लगाई गई थी और इससे चीन से सस्ते टायर के इंपोर्ट को रोकने में मदद मिली थी। हालांकि, पिछले साल दिसंबर में इस ड्यूटी को हटा दिया गया। बुद्धिराजा ने बताया, 'ड्यूटी वापस लिए जाने का असर अभी टायर इंडस्ट्री पर नहीं दिखा है। इसमें अभी कुछ और वक्त लग सकता है।'

ज्यादातर टायर कंपनियां पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर रही हैं, क्योंकि बिक्री सुस्त है। इस वजह से नेचुरल और सिंथेटिक रबड़ की खपत में भी गिरावट हुई है। जेके टायर्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (मटीरियल्स) आशीष पांडे ने बताया, 'इस साल सॉफ्टवेयर कंपनियों में छंटनी हुई है और इकनॉमिक ग्रोथ अनुमान से कम रहने के आसार हैं। हो सकता है कि इन वजहों से भारतीय उपभोक्ताओं ने कार खरीदने का फैसला टाल दिया हो।'

टायर एक्सपोर्ट ग्रोथ में पिछले साल ही गिरावट शुरू हो गई थी और मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में स्थिति और खराब हो गई। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023 में भारतीय टायरों के एक्सपोर्ट में 9 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, इससे पिछले साल में एक्सपोर्ट ग्रोथ काफी ज्यादा थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी, राजनीतिक संकट और मांग में सुस्ती से एक्सपोर्ट पर बुरा असर पड़ा है।

पांडे ने बताया, 'पिछले कुछ महीनों में टायर की कीमतों में गिरावट हुई है और कई देश मंदी के खतरे से जूझ रहे हैं। अमेरिका का घरेलू टायर प्रॉडक्शन सस्ते इंपोर्ट की वजह से प्रभावित हो रहा है। चुनाव नजदीक हैं, लिहाजा स्थानीय इंडस्ट्री की मदद के लिए इंपोर्ट में सख्ती पर विचार हो सकता है।'

इनपुट कॉस्ट में गिरावट

सिंथेटिक रबड़ आदि कच्चे माल सस्ते हो गए हैं और अब पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। इस रबड़ की अलग-अलग वेराइटी में 25 पर्सेंट की गिरावट हुई है और इसकी उपलब्धता भी पर्याप्त है। नेचुरल रबड़ की कीमतों में सालाना आधार पर 12 पर्सेंट की गिरावट हुई है। कोरोना के बाद फ्रेट रेट में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन अभी यह स्थिर है। पांडे को उम्मीद है कि इस बार भी पिछले सालों का ट्रेंड दोहराया जाएगा। उन्होंने कहा, 'कोरोना महामारी और युद्ध समेत सभी चीजें साल की पहली छमाही में हुईं। साथ ही, दूसरी छमाही में आर्थिक रिकवरी देखने को मिली। हमें उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भी ऐसा ही होगा।'

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