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AGR Dues: टेलिकॉम कंपनियों को नहीं मिलेगी राहत, सुप्रीम कोर्ट से Vodafone Idea, Bharti Airtel की याचिका खारिज

Vodafone Idea Limited ने अपने AGR बकाया के ब्याज, जुर्माने और जुर्माने पर ब्याज के रूप में करीब 30,000 करोड़ रुपये की छूट मांगी है। कंपनी ने अपनी स्पेक्ट्रम देनदारियों को इक्विटी में बदलकर सरकार को हिस्सेदारी दी है। अब कंपनी में सरकार के पास 49% इक्विटी स्टेक है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड May 19, 2025 पर 4:25 PM
AGR Dues: टेलिकॉम कंपनियों को नहीं मिलेगी राहत, सुप्रीम कोर्ट से Vodafone Idea, Bharti Airtel की याचिका खारिज
Vodafone Idea के शेयर में 19 मई को दिन में 12 प्रतिशत तक गिरावट आई।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 19 मई को टेलिकॉम कंपनियों वोडाफोन आइडिया, एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज की एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) बकाया माफ करने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि याचिकाओं को गलत तरीके से तैयार किया गया है। बेंच ने वोडाफोन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी से कहा, ''हम इन याचिकाओं से वाकई हैरान हैं, जो हमारे सामने आई हैं। एक मल्टीनेशनल कंपनी से इसकी उम्मीद नहीं की जाती। हम इसे खारिज करेंगे।''

सुप्रीम कोर्ट ने टेलिकॉम कंपनियों की मदद करने की सरकार की इच्छा के रास्ते में आने से इनकार किया। वोडाफोन आइडिया ने अपने एजीआर बकाया के ब्याज, जुर्माने और जुर्माने पर ब्याज के रूप में करीब 30,000 करोड़ रुपये की छूट मांगी है। रोहतगी ने पहले कहा था कि टेलिकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए याचिकाकर्ता कंपनी का अस्तित्व जरूरी है।

Vodafone Idea में सरकार के पास अब 49 प्रतिशत हिस्सेदारी

वोडाफोन आइडिया की ओर से तर्क दिया गया कि AGR फैसले द्वारा लगाई गई बाधाओं के कारण सरकार आगे राहत नहीं दे सकती है। वोडाफोन आइडिया ने अपनी स्पेक्ट्रम देनदारियों को इक्विटी में बदलकर सरकार को हिस्सेदारी दी है। अब कंपनी में सरकार के पास 49% इक्विटी स्टेक है। कंपनी पर अभी भी सरकार का AGR और स्पेक्ट्रम के मामले में 1.95 लाख करोड़ रुपये का बकाया है।वोडाफोन आइडिया ने यह भी कहा है कि सरकार के सपोर्ट के बिना वह वित्त वर्ष 2025-26 से आगे काम नहीं कर पाएगी। उसे दिवालियापन यानि इनसॉल्वेंसी के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

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