Suzlon Energy Share Price: मजबूत ऑर्डर बुक से सुजलॉन पर बुलिश मोतीलाल ओसवाल, रिजल्ट के बाद दिया ₹65 का टारगेट
Suzlon Energy Share Price: मार्च तिमाही के नतीजों के बाद ब्रोकरेज को सुजलॉन में अभी और दम नजर आ रहा है। 5.9 गीगावाट की मजबूत ऑर्डर बुक, रिकॉर्ड डिलीवरी और बढ़ती विंड एनर्जी मांग के बीच शेयर के लिए 65 रुपये का टारगेट दिया गया है।
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि सुजलॉन एनर्जी को आने वाले समय में नए ऑर्डर मिलेंगे।
Suzlon Energy Share Price: रिन्यूएबल और विंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy के मार्च तिमाही नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने शेयर पर अपनी पॉजिटिव राय बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखते हुए 65 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा करीब 57 रुपये के भाव के मुकाबले यह लगभग 14% संभावित तेजी का संकेत देता है।
क्यों बढ़ा टारगेट प्राइस पर भरोसा?
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि आने वाले समय में नए ऑर्डर मिलेंगे। प्रोजेक्ट्स का बेहतर एग्जीक्यूशन भी सुजलॉन की ग्रोथ की रफ्तार बढ़ा सकते हैं। Motilal Oswal ने वित्त वर्ष 2028 के अनुमानित प्रति शेयर कमाई (EPS) के आधार पर 27 गुना वैल्यूएशन लगाकर 65 रुपये का टारगेट तय किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक सुजलॉन ने वित्त वर्ष 2026 के लिए तय लगभग 60% वृद्धि के लक्ष्य को हासिल किया है। साथ ही ऑर्डर बुक में EPC प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बढ़ रहा है। इससे आगे डिलीवरी और कारोबार को मजबूती मिल सकती है।
मार्च तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में सुजलॉन का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5,493 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 45% ज्यादा है। इस दौरान कंपनी की ऑपरेशनल इनकम (EBITDA) 39% बढ़कर 964 करोड़ रुपये पहुंच गई। EBITDA मार्जिन करीब 18% रहा।
कंपनी का एडजस्टेड नेट प्रॉफिट 760 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 31% अधिक है। कम टैक्स देनदारी और कुछ एकमुश्त फायदों का भी मुनाफे पर सकारात्मक असर पड़ा।
पूरे साल में रिकॉर्ड डिलीवरी
सुजलॉन के लिए वित्त वर्ष 2026 मजबूत रहा। कंपनी ने पूरे साल में 2,456 मेगावाट की डिलीवरी की, जो एक साल पहले के मुकाबले 58% अधिक है। इसी दौरान रेवेन्यू 54% बढ़कर 16,732 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एडजस्टेड नेट प्रॉफिट 42% बढ़कर 2,091 करोड़ रुपये रहा।
मार्च तिमाही में अकेले 830 मेगावाट की डिलीवरी हुई। यह कंपनी के लिए अब तक के मजबूत तिमाही आंकड़ों में शामिल है।
ऑर्डर बुक से मिल रहा सहारा
मार्च 2026 के आखिर तक सुजलॉन की ऑर्डर बुक 5.9 गीगावाट रही। इसमें 51% हिस्सा कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों का है। साथ ही, केंद्र-राज्य के ऑक्शन वाले प्रोजेक्ट्स का हिस्सा 34% है। वहीं, 15% हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का है।
इस बात को ब्रोकरेज ने खास तौर पर सकारात्मक माना है कि EPC प्रोजेक्ट्स का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। दूसरी तिमाही के अंत में यह 22% था, जो अब बढ़कर 28% हो गया है। कंपनी इसे वित्त वर्ष 2028 तक 50% तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।
आगे क्या रहेगा फोकस?
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक आने वाले समय में नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार, प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी और इंस्टॉलेशन की रफ्तार पर निवेशकों की नजर रहेगी। आंध्र प्रदेश में 2.1 गीगावाट की विकास परियोजनाएं भी कंपनी के लिए बड़ा अवसर मानी जा रही हैं। इनमें से 775 मेगावाट प्रोजेक्ट जरूरी मंजूरी का इंतजार कर रही है। वहीं, बाकी क्षमता को EPC कॉन्ट्रैक्ट के जरिए कारोबार में बदला जा सकता है।
सुजलॉन के मैनेजमेंट का अनुमान है कि देश में विंड एनर्जी इंस्टॉलेशन वित्त वर्ष 2027 में 8 गीगावाट और वित्त वर्ष 2028 में 10 गीगावाट तक पहुंच सकती है। आगे चलकर यह आंकड़ा 15 गीगावाट तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में पवन ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग का फायदा Suzlon जैसी कंपनियों को मिल सकता है।
किन जोखिमों पर नजर जरूरी?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि EPC कारोबार का हिस्सा बढ़ने से कंपनी को कामकाज के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही भविष्य की वृद्धि काफी हद तक नए ऑर्डर मिलने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर निर्भर करेगी। इसलिए निवेशकों के लिए इन पहलुओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
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