Swan Defence को केमिकल टैंकर के लिए मिला देश का सबसे बड़ा ऑर्डर, ₹2000 करोड़ है वैल्यू

Swan Defence Share Price: इन केमिकल टैंकरों को नॉर्वे स्थित मैरिनफॉर्म AS और पोलैंड के स्टोगाडा शिप डिजाइन एंड इंजीनियरिंग द्वारा डिजाइन किया जाएगा। 6 IMO टाइप II केमिकल टैंकरों में से पहला 33 महीनों के अंदर डिलीवर किया जाना है

अपडेटेड Jan 24, 2026 पर 3:04 PM
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टैंकर गुजरात के पिपावाव के शिपयार्ड में बनाए जाएंगे।

स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज लिमिटेड को यूरोप की शिप कंपनी Rederiet Stenersen से 22.7 करोड़ डॉलर या लगभग 2,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। यह केमिकल टैंकर बनाने के लिए है। कंपनी ने कहा कि उसे 6 IMO टाइप II केमिकल टैंकरों के लिए पहला नया बिल्ड कॉन्ट्रैक्ट मिला है। हर एक टैंकर 18,000 DWT का है। ये टैंकर गुजरात के पिपावाव के शिपयार्ड में बनाए जाएंगे।

इन 6 IMO टाइप II केमिकल टैंकरों में से पहला 33 महीनों के अंदर डिलीवर किया जाना है। बाद की डिलीवरी रेगुलर इंटरवल पर प्लान की गई हैं। हर टैंकर की कुल लंबाई लगभग 150 मीटर और बीम लगभग 23 मीटर होगी। इन वेसल्स में एडवांस्ड ड्युअल-फ्यूल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG)-रेडी हाइब्रिड प्रोपल्शन होगा। साथ ही इनमें कई ऑपरेशनल मोड होंगे, जिन्हें हाई लेवल ऑटोमेशन का सपोर्ट रहेगा।

इन केमिकल टैंकरों को नॉर्वे स्थित मैरिनफॉर्म AS और पोलैंड के स्टोगाडा शिप डिजाइन एंड इंजीनियरिंग द्वारा डिजाइन किया जाएगा। स्वान डिफेंस का कहना है कि यह ऑर्डर भारत का सबसे बड़ा सिंगल कमर्शियल शिपबिल्डिंग ऑर्डर है। साथ ही यह किसी भारतीय शिपयार्ड को दिया गया पहला और सबसे बड़ा केमिकल टैंकर ऑर्डर है।


6 महीनों में 450 प्रतिशत चढ़ा Swan Defence शेयर

स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज लिमिटेड का शेयर 6 महीनों में लगभग 450 प्रतिशत और 3 महीनों में करीब 140 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 19 जनवरी के बाद से शेयर में ट्रेडिंग रिस्ट्रिक्टेड है। कंपनी का पुराना नाम Reliance Naval and Engineering Limited था। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी में दिसंबर 2025 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 94.91 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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सितंबर 2025 तिमाही में स्वान डिफेंस का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 39.57 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2025 के दौरान रेवेन्यू 7 करोड़ रुपये रहा था। सितंबर 2025 में कंपनी ने कोरियाई दिग्गज सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज के साथ एक MoU साइन किया था। यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कमर्शियल शिपबिल्डिंग और हेवी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स को मिलकर तलाशने के लिए है। यह समझौता कंपनियों को टैंकर, गैस कैरियर, कंटेनर जहाज और अन्य स्पेशलाइज्ड जहाजों के निर्माण में उतरने की इजाजत देता है।

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