Tariffs Impact : अमेरिका ने दुनिया में टैरिफ वॉर छेड़ दिया है। ट्रंप सरकार ने मैक्सिको, कनाडा और चीन पर नए टैरिफ का ऐलान कर दिया है। इस टैरिफ वॉर को लेकर दुनिया भर के बाजारों में कमजोरी है। भारतीय बाजार भी इससे अछूते नहीं हैं। अमेरिका का कदम किन सेक्टर्स के लिए पॉजिटिव है और किन के लिए निगेटिव। आइए डालते हैं एक नजर।
टैरिफ का असर भारतीय कंपनियों के कारोबार के लिए बेहतर साबित हो सकता है। भारतीय कंपनियों को कारोबार फैलाने का ज्यादा मौका मिलेगा। टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल कंपनियों के लिए पॉजिटिव होगा। US कंपनियां चीन+1 का मौका तलाशेंगी। वहीं कनाडा तेल-गैप पर टैरिफ लगने से भारतीय तेल की मांग बढ़ सकती है। जबकि चीन+1 के चलते भारत में FDI निवेश बढ़ सकता है। हालांकि ग्लोबल ट्रेड सप्लाई चेन में दिक्कत से महंगाई बढ़ने का खतरा होगा।
केमिकल कंपनियों के लिए पॉजिटिव
टैरिफ वॉर भारतीय केमिकल कंपनियों के लिए पॉजिटिव है। चीन पर टैरिफ लगने से भारतीय केमिकल की मांग बढ़ेगी।केमिकल सेक्टर में PI Ind को फायदा होगा। कंपनी ने पहले चीन से प्राइसिंग दबाव झेला लेकिन अब वो कम होगा। कंपनी Pyrosulfone बनाती है, आय में 30-35% का योगदान रहा। Pyrosulfone की मांग में आगे जोरदार सुधार संभव है।
टैरिफ से UPL को फायदा होगा। दरअसल, कंपनी Glufosinate बनाती है इसकी US में बड़ी मांग है। चीन प्रतिस्पर्धा से कीमतें टूटी है। अब राहत मिलेगी।
वहीं Jubilant Ingravia चीन को छोड़कर दुनिया की अकेली Pyridine बनाने वाली कंपनी है। एग्रोकेमिकल, फार्मा, सेमिकंडक्टर सेक्टर से आगे मांग बढ़ सकती है।
फार्मा कंपनियों के लिए निगेटिव
US ने कनाडा पर 25% टैरिफ लगाया है जिससे फार्मा कंपनियों को नुकसान होगा। दरअसल, कई भारतीय फार्मा कंपनियों के प्लांट कनाडा में है। टैरिफ से पीरामल फार्मा (piramal pharma) को नुकसान हो सकता है। मई 2022 में कनाडा के Ontario में API प्लांट शुरू की थी।
वहीं सन फार्मा (sun pharma) की सब्सिडियरी टैरो की कनाडा में मौजूदगी है। टैरो की कई बड़ी दवाइयां अमेरिका में बिकती हैं। जुबिलेंट फार्मोवा (Jubilant Pharmova) को नुकसान हो सकता है। कंपनी मोंट्रियल, कनाडा में CDMO Sterile Ophthalmic प्लांट है। वहीं ल्यूपिन की भी कनाडा में जोरदार मौजूदगी है।
ऑटो एंसिलरी कंपनियों को नुकसान
भारतीय कंपनियों मैक्सिको में उत्पादन एक्सपोर्ट करती हैं। कुल एक्सपोर्ट का 3% मैक्सिको को होता है। $65.6 Cr का एक्सपोर्ट मैक्सिको को होता है। मैक्सिको में सोना BLW की फैक्ट्री है। कंपनी की कुल आय का 2% मैक्सिको से आता है।
वहीं मैक्सिको, US में संवर्धन मदरसन के कई प्लांट मौजूद है। कंपनी की कुल आय का 4% यहां से आता है।
US अपना माल भारत जैसे देशों की तरफ मोड़ेगा। ओवर सप्लाई से भारतीय कंपनियों पर प्राइसिंग दबाव आएगा। भारतीय मेटल कंपनियां बड़े पैमाने पर कच्चा माल, इक्विपमेंट इंपोर्ट करता है। मजबूत रुपये से इंपोर्ट महंगा होगा और मार्जिन पर दबाव आने की संभावनाएं है।