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Tcs ceo k krithivasan: टीसीएस के सीईओ ने कहा- ट्रंप टैरिफ का सबसे ज्यादा असर रिटेल, ट्रैवल और ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा

टीसीएस के रेवेन्यू में करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी उत्तरी अमेरिका की है। दरअसल, अमेरिका इंडियन आईटी कंपनियों के लिए सबसे बड़ा मार्केट है। टैरिफ के चलते अमेरिकी क्लाइंट्स को दिक्कत आएगी, जिसका असर इंडियन आईटी कंपनियों के बिजनेस पर भी पड़ेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 14, 2025 पर 1:09 PM
Tcs ceo k krithivasan: टीसीएस के सीईओ ने कहा- ट्रंप टैरिफ का सबसे ज्यादा असर रिटेल, ट्रैवल और ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा
12 अप्रैल को टीसीएस का स्टॉक 0.26 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 3,238 रुपये पर बंद हुआ।

टीसीएस के सीईओ कृत्तिवासन ने कहा कि अमेरिकी सरकार के टैरिफ का सबसे ज्यादा असर रिटेल, ट्रैवल और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ेगा। रायटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी की वजह से अगर अनिश्चचितता बनी रहती है तो इन सेक्टर्स की कंपनियां अपने खर्च में कमी करने को मजबूर कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर पर ट्रेड टेंशन का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

ट्रेड वॉर जारी रहने पर कंपनियां खर्च में कमी करने को मजबूर होंगी

उन्होंने कहा, "कंज्यूमर बिजनेस, हॉस्पिटैलिटी बिजनेस, ट्रैवल और ऑटो इंडस्ट्री ऐसे बिजनेसेज हैं, जिन पर हमें नजर रखनी पड़ेगी। अगर टैरिफ वॉर (Tariff War) की वजह से अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहती है तो इन सेक्टर की कंपनियों को अपने खर्च में कमी करने को मजबूर होना पड़ेगा।" हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी हमने किसी बड़े बदलाव के बारे में नहीं सुना है। यह ध्यान रखने वाली बात है कि TCS के रेवेन्यू में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की करीब एक तिहाई हिस्सेदारी है। टीसीएस के रेवेन्यू में रिटेल की दूसरी और मैन्युफैक्चरिंग की चौथी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। बैंकिंग इस लिहाज से नंबर वन है।

टीसीएस के रेवेन्यू में उत्तरी अमेरिका की करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी

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