बड़े बदलाव से गुजर रहीं TCS, इंफोसिस विप्रो! समझिए AI से आईटी सेक्टर कितना बड़ा लगेगा झटका

भारत की टॉप आईटी कंपनियां AI के दौर में बड़े बदलाव से गुजर रही हैं। पारंपरिक बिजनेस पर दबाव है, लेकिन नए मौके भी बन रहे हैं। जानिए FY27 में सेक्टर की दिशा क्या रह सकती है और कंपनियों का आउटलुक कैसा है।

अपडेटेड Apr 26, 2026 पर 11:07 PM
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आईटी सेक्टर धीरे-धीरे पारंपरिक, मेहनत वाले सर्विस मॉडल से दूर जा रहा है।

भारत की टॉप आईटी कंपनियां- TCS, Infosys, HCLTech, Wipro और Tech Mahindra वित्त वर्ष 26 के अंत में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही हैं। ग्लोबल आर्थिक दबाव, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और तेजी से बढ़ती AI तकनीक ने इस सेक्टर की दिशा बदलनी शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक- अब आईटी कंपनियां पुराने मॉडल से निकलकर नए तरीके से काम करने की तरफ बढ़ रही हैं।

आईटी सेक्टर में क्या बदल रहा है

आईटी सेक्टर धीरे-धीरे पारंपरिक, मेहनत वाले सर्विस मॉडल से दूर जा रहा है। AI के चलते काम तेजी से हो रहा है। इससे पुराने बिजनेस में रेवेन्यू पर दबाव आ रहा है।


हालांकि, दूसरी तरफ बड़े AI बेस्ड डील्स बढ़ रहे हैं, जो इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित कर रहे हैं। कंपनियां अब बड़े-बड़े कॉन्ट्रैक्ट की बजाय छोटे-छोटे मॉड्यूलर प्रोजेक्ट्स की तरफ बढ़ रही हैं।

FY27 को लेकर अलग-अलग संकेत

आने वाले वित्त वर्ष को लेकर कंपनियों की राय अलग-अलग है। TCS और Infosys को उम्मीद है कि मैक्रो दबाव कम हो सकता है। वहीं HCLTech और Wipro का मानना है कि अभी भी अनिश्चितता बनी रहेगी और डिमांड कमजोर रह सकती है।

AI का असर कितना बड़ा होगा

ICICI Direct के मुताबिक, आने वाले कुछ सालों में AI के कारण पारंपरिक आईटी सेवाओं के रेवेन्यू में हर साल 2-3% की कमी आ सकती है।

लेकिन दूसरी तरफ AI से बड़ा मौका भी बन रहा है। 2030 तक भारतीय आईटी सेक्टर के लिए AI के जरिए 300-400 अरब डॉलर का नया बाजार तैयार हो सकता है।

TCS

TCS ने मार्च तिमाही में 12.22% बढ़त के साथ 13,718 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। रेवेन्यू 9.64% बढ़कर 70,698 करोड़ रुपये रहा। पूरे FY26 में कंपनी का मुनाफा 1.35% बढ़कर 49,210 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 4.58% बढ़कर 2.67 लाख करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी का कहना है कि वह नए वित्त वर्ष में पॉजिटिव मोमेंटम के साथ जा रही है और ज्यादातर चुनौतियां अब पीछे रह गई हैं। AI सर्विसेज से सालाना रेवेन्यू 2.3 अरब डॉलर को पार कर चुका है, जो कुल रेवेन्यू का 6% से ज्यादा है।

CEO के. कृतिवासन के मुताबिक, वेस्ट एशिया संकट का असर सीमित रहेगा। यह मुख्य रूप से ट्रैवल, ट्रांसपोर्ट और गल्फ क्षेत्र के क्लाइंट्स तक ही सीमित हो सकता है।

Infosys

Infosys का मार्च तिमाही में नेट प्रॉफिट 20.8% बढ़कर 8,501 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 13.4% बढ़कर 46,402 करोड़ रुपये हो गया। पूरे FY26 में मुनाफा 10.20% बढ़कर 29,440 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 9.6% बढ़कर 1,78,650 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने माना है कि AI पारंपरिक सेवाओं पर असर डाल रहा है। लेकिन AI बेस्ड सर्विसेज की ग्रोथ इस प्रभाव को संतुलित कर रही है।

CEO सलिल पारेख के मुताबिक, ईरान से जुड़े तनाव के बावजूद बाजार में स्थिरता के संकेत हैं। जिन अर्थव्यवस्थाओं में कंपनी काम करती है, वहां मजबूती बनी हुई है।

HCLTech

HCLTech का मार्च तिमाही में नेट प्रॉफिट 4.2% बढ़कर 4,488 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 12.34% बढ़कर 33,981 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि पूरे FY26 में कंपनी का मुनाफा 4.30% घटकर 16,642 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 11.18% बढ़कर 1,30,144 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने FY27 के लिए 1-4% ग्रोथ का अनुमान दिया है और कहा है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

CEO सी विजयकुमार के मुताबिक, कुछ बिजनेस हिस्सों में कमजोरी, कम खर्च और फैसलों में देरी के कारण प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा। हालांकि AI आधारित सर्विसेज में तेजी दिख रही है और Q4 में AI रेवेन्यू 620 मिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है।

Wipro

Wipro का मार्च तिमाही में नेट प्रॉफिट 1.89% घटकर 3,501.8 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 7.6% बढ़कर 24,236.3 करोड़ रुपये हो गया। पूरे FY26 में कंपनी का मुनाफा मामूली 0.47% बढ़कर 13,197.4 करोड़ रुपये रहा और रेवेन्यू 92,624 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

कंपनी ने मौजूदा माहौल को 'न्यू नॉर्मल' बताया है, जो भू-राजनीतिक और पॉलिसी से जुड़े बदलावों से प्रभावित है। साथ ही कंपनी ने 15,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक को मंजूरी दी है।

Tech Mahindra

Tech Mahindra का मार्च तिमाही में नेट प्रॉफिट 16% बढ़कर 1,353.8 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 12.6% बढ़कर 15,076.1 करोड़ रुपये हो गया। पूरे FY26 में मुनाफा 13.15% बढ़कर 4,810.9 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 7.2% बढ़कर 56,815.4 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी का मानना है कि AI मध्यम और लंबी अवधि में क्लाइंट्स के ट्रांसफॉर्मेशन के लिए बड़ा मौका है, न कि रेवेन्यू के लिए खतरा।

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