Divi's Labs के पास API मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट में ग्लोबल लीडर बनने का मौका

देश की सबसे बड़ी एपीआई (एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट) मैन्युफैक्चरिंग कंपनी डिविस लैबोरेट्रीज , ग्लोबल फार्मा की दुनिया में हो रहे बदलावों से रूबरू हो रही है। ऐसे में डिविस के लिए ग्रोथ के काफी मौके हैं। कंपनी के पास चाइनीज प्रतिस्पर्धी कंपनियों से मार्केट शेयर हासिल करने और ग्लोबल लेवल पर इस सेगमेंट की मुख्य कंपनी बनने भी मौका है

अपडेटेड Aug 16, 2023 पर 5:35 PM
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डिविस लैब्स मीडिया एपीआई सेगमेंट में एंट्री कर रही है, जिसकी ग्लोबल सेल्स तकरीबन 5 अरब डॉलर है।

Divi's Laboratories: देश की सबसे बड़ी एपीआई (एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट) मैन्युफैक्चरिंग कंपनी डिविस लैबोरेट्रीज , ग्लोबल फार्मा की दुनिया में हो रहे बदलावों से रूबरू हो रही है। ऐसे में डिविस के लिए ग्रोथ के काफी मौके हैं। कंपनी के पास चाइनीज प्रतिस्पर्धी कंपनियों से मार्केट शेयर हासिल करने और ग्लोबल लेवल पर इस सेगमेंट की मुख्य कंपनी बनने का भी मौका है।

कंपनी की प्रतिस्पर्धा कई चाइनीज कंपनियों से है और इस मुकाबले में डिविस लैब्स पश्चिमी देशों की फार्मा कंपनियों की पसंदीदा पार्टनर बनकर उभरी है। इसकी कुछ खास वजहें हैं- मसलन बौद्धिक संपदा संबंधी नियमों के पालन में कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड, अपने एपीआई क्लाइंट्स के साथ कंपनी का प्रतिस्पर्धा में नहीं होना और बेहतर व किफायती मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस।

मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स (Marcellus Investment Managers ) का कहना है कि डिविस लैब्स अपने कई एपीआई मसलन नैप्रोक्सिन (naproxen), डेक्ट्रोमेथॉर्फन (dextromethorphan) आदि के लिए कॉस्ट के मामले में ग्लोबल चैंपियन है। फर्म ने कहा, 'भारत में एपीआई मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बदलाव की वजह से डिविस को बड़े मौके मिल सकते हैं।'


भविष्य में बेहतर ग्रोथ की उम्मीद

कोविड के बाद कंपनी के फाइनेंशियल्स पर दबाव रहा है। कोविड के दौरान कंपनी की सेल्स काफी बढ़ गई थी और इस हिसाब से कंपनी के लिए आगे लक्ष्य हासिल करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। हालांकि, कंपनी ग्रोथ के अगले दौर के लिए कोशिश में जुटी है। इसके तहत डिविस लैब्स मीडिया एपीआई सेगमेंट में एंट्री कर रही है, जिसकी ग्लोबल सेल्स तकरीबन 5 अरब डॉलर है। डिविस ने इस सिलसिले में एक बड़ी फार्मा कंपनी के लिए क्लाइंट वैलिडेशन पूरा कर लिया है, जबकि दूसरे के साथ डील करने की तैयारी में है।

ब्रोकरेज फर्म मोती लाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services) का मानना है कि एपीआई जेनरिक सेगमेंट में प्रॉफिट और मार्केट शेयर में बढ़ोतरी लो-कॉस्ट मैन्युफैक्चरिंग के मामले में कंपनी की सफलता पर निर्भर करती है।

वैल्यूएंशस

साल 2022 के शुरू से अब तक कंपनी के शेयरों में काफी गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले साल से लेकर इस साल मार्च तक कंपनी का शेयर 45 पर्सेंट से भी ज्यादा लुढ़क गया। हालांकि, लॉन्ग टर्म ग्रोथ बेहतर रहने और सस्ते वैल्यूएशंस की उम्मीदों से पिछले तीन महीनों में कंपनी ने 10.5 पर्सेंट की वापसी है।

नतीजतन, कंपनी का स्टॉक फिलहाल फाइनेंशियल ईयर 2024 के लिए प्रति स्टॉक अर्निंग के अनुमानों के मुकाबले 45.2 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक, यह वैल्यूएशन थोड़ा महंगा है। हालांकि, जानकारों की राय में लॉन्ग टर्म ग्रोथ के नजरिये से कंपनी की परफॉर्मेंस बेहतर रहने का अनुमान है।

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